तुम प्रणय की मन मयूरी

तुम अनोखी तुम निराली

तुम नटखट तुम मतवाली

जिन्दगी तुमसे ही पूरी

तुम प्रणय की मन मयूरी

आज का दिन ही था सुन्दर

तुम बन के आयी सांझ प्यारी

उस दिन जुड़ गयी तुमसे धुरी

तुम प्रणय की मन मयूरी

जब मिला तुमसे लगा था

कुछ तो रिश्ता है पुराना

फिर मिट गयी अपनी वो दूरी

तुम प्रणय की मन मयूरी

ऐसे ही रहना साथ हरदम

कि रूह भी अब ना जुदा हो

तुम्हारे सिवा कुछ ना जरूरी

तुम प्रणय की मन मयूरी

प्रणय.

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अहमियत तेरी

तू ही तू बस बन गयी है आदत मेरी

जुदा हो के पता चली अहमियत तेरी

तू होती थी तो सुबह एक झंकार लेके आती थी

तू होती थी तो शाम बहुत सा प्यार लेके आती थी

तेरी मुस्कान मेरे चेहरे पर निखार लेके आती थी

याद है जब तू थाली मे अचार लेके आती थी

याद आती है आलस भरी मासूमियत तेरी

जुदा हो के पता चली अहमियत तेरी

आजकल नहाने के बाद टावल नहीं मिलता है

बालकनी के पौधों में कोई फूल नहीं खिलता है

मंदिर में देर तक दिया नहीं जलता है

तेरे बिनाये घर अब घर नहीं लगता है

मेरी गाड़ी की पीछे की सीट को है जरूरत तेरी

जुदा हो के पता चली अहमियत तेरी

प्रणय

ओ रे पिया आना कभी

ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे
बैठ कर बातें करेंगे कुछ पुरानी प्यार से

तेरी वो मोहिनी बातों में फिर से उलझा करूंगा मैं यूंही
तेरे चेहरे को तकते तकते खोया करूंगा मैं कहीं
तू जब ह्म्म्म कहेगी ठहराव लेकर कभी किसी बात पे
मेरे बेचैन हाथों को मैं रख दूंगा फिर तेरे हाथ पे

तेरे बिना कैसे जिया, कैसे रातें कटी तेरे बिना
ये बताऊँगा किसी बहाने से हर रात की बातें गिना
मुझे पता है तेरे पास भी किस्से बहुत हैं सुनाने को
मेरे दिल के पन्ने भी खाली हैं इन सबको लिखे जाने को

है जिंदगी ही वार दी बस तेरी आँखों के इकरार पे
ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे

प्रणय

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

वो मज़ा नहीं किसी में जो आधे प्यार में है

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है 

जब चाँद आधा, हो रात भी आधी अधूरी 

तब रात रानी की महक होती बहार में है 

जब सीप की खिड़की हो थोड़ी अधखुली सी 

तभी बनता है मोती जो आपके हार में है 

ख्वाहिशे हो गयी पूरी तो मकसद क्या रहेगा 

ज़िन्दगी तो आधे चैन आधे करार में है 

जो आधा अधूरा, उलझा हुआ सा लग रहा है 

वही इंसान तो पूरी तरह से प्यार में है 

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

प्रणय 

अब मिला हूँ तुम से

तुम्हे बताऊँ कितना इंतज़ार था मुझे
इस आने वाली घडी से कितना प्यार था मुझे
जब आया है ये वक़्त तो गवाऊँ कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

नाउम्मीद ना होने दिया इस दिल को मेने
किस तरह ढूंढा है साहिल को मेने
चाहत की उस इंतहां को जताऊं कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

एक वादा किया था खुद से पाना है तुम्हे
ख्वाबों से हकीकत में लाना है तुम्हे
तुम्ही बोलो वादे से मुकर जाऊं कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

प्रणय

कानो कान किसी को खबर न होगी

जी भर के आज ऐश तो कर ले
दिल की मस्ती को cash तो कर ले
फिर बाद में इसकी उमर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

आज करना वही जो मूड में होगा
दिल तेरा नशे के घूट में होगा
फिर क्या जाने कब मिले ये मौका
न जाने कब तू ताबूत में होगा

आज कम ज्यादा की कदर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

अरे हाथ उठा कर कर ले दंगल
छोड़ society बना दे जंगल
weekdays तो तू बेच चूका है
weekend पे मंगल ही मंगल

अब control में तेरी नज़र न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

जेब है खाली फिकर नहीं रे
मस्ती पे इसका असर नहीं रे
सही गलत की छोड़ दे चिंता
जो दिल बोले है वही सही रे

आज पाप पुण्य की बकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

दुनिया में आये तो जीना होगा
जीवन है ज़हर पर पीना होगा
उस ज़हर में थोड़ी रम तो मिला ले
फिर DJ पर धुम-तक-धीना होगा

और गम की कोई फिकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

प्रणय

शायद गुम हो गयी ख्वाबों से !

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से
कोई ख्वाहिश थी एक छोटी सी
शायद गुम हो गयी ख्वाबों से

अक्सर कहलाती इश्क़ जो थी
बस प्यार की आखरी किश्त जो थी
वो धुंधली सी कुछ हो गयी है
उसका ज़िक्र खो गया बातों से

जब दूर हो गया उस से तो
जब ख़त्म हो गए किस्से तो
तब एक ज़माना बीत गया
जैसे नींद सी उड़ गयी रातों से

दिल की किताब में एक पन्ना था
जिसे कभी से अपना बनना था
वो मुड़ा हुआ पन्ना खो गया
जैसे रेत फिसल गयी हाथों से

मन जैसे कुछ बेचैन सा है
दीदार को प्यासे नैन सा है
पलकें जो बिछा दी राहों में
जैसे चमक सी खो गयी आँखों से

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से

प्रणय