ओ रे पिया आना कभी

ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे
बैठ कर बातें करेंगे कुछ पुरानी प्यार से

तेरी वो मोहिनी बातों में फिर से उलझा करूंगा मैं यूंही
तेरे चेहरे को तकते तकते खोया करूंगा मैं कहीं
तू जब ह्म्म्म कहेगी ठहराव लेकर कभी किसी बात पे
मेरे बेचैन हाथों को मैं रख दूंगा फिर तेरे हाथ पे

तेरे बिना कैसे जिया, कैसे रातें कटी तेरे बिना
ये बताऊँगा किसी बहाने से हर रात की बातें गिना
मुझे पता है तेरे पास भी किस्से बहुत हैं सुनाने को
मेरे दिल के पन्ने भी खाली हैं इन सबको लिखे जाने को

है जिंदगी ही वार दी बस तेरी आँखों के इकरार पे
ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे

प्रणय