नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

वो मज़ा नहीं किसी में जो आधे प्यार में है

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है 

जब चाँद आधा, हो रात भी आधी अधूरी 

तब रात रानी की महक होती बहार में है 

जब सीप की खिड़की हो थोड़ी अधखुली सी 

तभी बनता है मोती जो आपके हार में है 

ख्वाहिशे हो गयी पूरी तो मकसद क्या रहेगा 

ज़िन्दगी तो आधे चैन आधे करार में है 

जो आधा अधूरा, उलझा हुआ सा लग रहा है 

वही इंसान तो पूरी तरह से प्यार में है 

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

प्रणय