तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है !

तेरे सिवा मेरी कोई रज़ा कहाँ है

तू मुझ मे ही कहीं बसी है मुझ से जुदा कहाँ है

 

तेरे सांस लेने से मेरा दिल धड़कता है

तू नहीं है तो मुझ मे मेरी जां कहाँ है

 

दिल का दरिया बहता है तेरी ही खातिर

तेरी नय्या है इसमें और कश्तीयां कहाँ है

 

तेरी मुस्कान से ही ज़िंदगी चल रही है मेरी

बिना तेरे इसमे मज़ा कहाँ है

 

मेरी ज़िद है तू, जज़्बा है, है मोहब्बत मेरी

दुनिया मे कोई इस कदर तुझ पे फिदा कहाँ है

 

तेरी राहों मे बनकर फूल मैं बिछता ही रहूँगा

तेरे कदमों के सिवा जहां मे फिज़ा कहाँ है

 

यूं ही आती रहना ख्वाबों मे मेरे

जब से सोया है तेरे ख़यालों मे दिल जागा कहाँ है

 

तेरी आंखे, तेरी बातें, तेरी ख़ुशबू, तेरी ज़ुल्फें

तेरे नख़रे सी दुनिया मे कोई अदा कहाँ है

 

रहे ऐसे ही तू इस दिल के जहां मे

इसके सिवा रब से कोई दुआ कहाँ है

 

तू यादों मे, बातों मे, निगाहों मे छुपी है

मत पूछ तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है

 

प्रणय

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