था चेहरा जाना पहचाना

आज शाम देखा एक लड़की को

था चेहरा जाना पहचाना


अभी कुछ पल पहले की बात है जैसे

जब हाथों की उँगलियों के बराबर उम्र थी

बस दोस्ती के बारे मे ही सुना था हमने

प्यार की हमको नहीं खबर थी


 

पीछे बैठ कर बस करते थे इंतज़ार

कि वो मुड़ेगी और देखेगी मुस्कुरा कर

किताबों के पन्नों मे मन कहाँ था

सिर्फ देखते थे उसको ही आँखें चुरा कर


 

चंचल थे उसके बाल , मासूम सी आँखें

गुलाब से होंठ , ईत्र सी बातें

जब गलती से छू जाता था उसका हाथ मेरे हाथ से

फिर नींद का रिश्ता नहीं रहता था दिन से रात से


 

वो मिल गयी थी आज एक ज़माने बाद

वो मेरे ज़हन मे अब भी है पर उसको नहीं मैं याद

मेरी तरफ मुड़ी वो और मुस्कुराई

पर वो और उसकी नज़रें दोनों थी पराई


 

पूछा उसने कैसे हो, हम ने भी हाल बता दिया

लब्ज़ आज भी कह नहीं पाये, आँखों ने सब कुछ जता दिया

कहा याद मेरी आती है या भूल चुके हो अब सब कुछ

हम मुस्कुरा कर रह गए बस ज़ख्म उभर आए कुछ कुछ


 

कैसे बताएं तुम्हें कि बस तुम्हारा ही तो इंतज़ार था

पर दिल को अब समझा ही लिया कि तू किसी और का प्यार था

तू ख़ुश है इतना काफी है तेरे दिल को भी अब माफी है

तेरी यादों मे खुद को तड़पाना सरासर नाइंसाफी है


 

सब सपने पूरे होते नहीं सब लोग यही तो कहते है

कुछ लोग हमारी ज़िंदगी मे न होते हुये भी रहते है

तेरी यादों के गुच्छे मे से रोज़ एक धागा तोड़ लूँगा मैं

फिर सपने उन से बुन लूँगा बस इस तरहा जी लूँगा मैं


 

प्रणय

1 Comment

  1. कहा याद मेरी आती है या भूल चुके हो अब सब कुछ

    हम मुस्कुरा कर रह गए बस ज़ख्म उभर आए कुछ कुछ

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s