मेरे दिल का शिकारा तेरी झील सी आँखों मे टहलता है !

मेरे दिल का शिकारा तेरी झील सी आँखों मे टहलता है

मन मेरा तेरी ज़ुल्फों की छांव मे बहलता है

मेरी बेताबियों का भँवरा मँडराता है तेरे गुलाब से होंठों के लिए

तेरी पलकों के तीखे तीर से तैयार है हम जान देने के लिए

तेरी वो मासूम सी बोली मिश्री घोल दे ज़हर मे भी

तेरी वो बेफिक्र अंगड़ाइयाँ सुकून दे तपती दोपहर मे भी

तेरी कमर की लचक जैसे नदिया की टेढ़ी राहें

तेरी हिरनी सी चाल जो देख के निकली आहें

तेरे होंठों के सुर्ख रंग को ही चुराया है शाम के सूरज ने

तेरे बदन की बनावट को ही उकेरा है अजंता की मूरत मे

तेरे हाथों की वो छुअन जैसे दस्तक हो बहार की

तेरे कदमो की धीमी आहट जैसे थपकी हो प्यार की

मन मेरा बस गुम रहता है तेरे दीदार के खयाल मे

फस गया हो जैसे परवाना शमा के खूबसूरत जाल मे

तेरा वो आँचल जैसे वादियों पर कोई बादल छाया

और तेरा वो मुस्कुराना जैसे मरते ने ज़िंदगी को पाया

प्रणय