गलतफहमी ही सही पर बहलाने को अच्छी है !

ये गलतफहमी ही सही पर बहलाने को अच्छी है

कि मैं उसके ख्वाबों मे आता हूँ वो मुझ से प्यार करती है

ये बात ही दिल को मेरे सुकून देती है

कि मेरा ज़िक्र होने पर वो ठंडी आह भरती है

हकीकत जानने मे अब थोड़ा डर सा लगता है

कि क्या सामने आएगा और कैसे गुजरेगा

ये हकीकत है कोई सूरज नहीं यारों

कि जब रात को जाएगा तो कल पूरब ही से निकलेगा

चलो देखें आज़मा के किस्मत को भी अपनी

कि सूरज को कभी पश्चिम से उगते भी देखा है

कहीं ये हकीकत हो और हम गलत फहमी समझ बैठे

कि गलतफहमी और हकीकत मे यूं फर्क ही कितना है

प्रणय