मौत से मुलाक़ात

कल मौत से मुलाक़ात हुई

हाँ सही मे बहुत खूबसूरत थी वो

आँखों में तेज़ , होंठों पर मुस्कान

चेहरे पर शांति , आवाज़ में मिठास

बडी अदब थी उसकी खातिरदारी में

एक सुकून मिला उसके साथ बैठ कर

फिर मेने पूछ ही लिया , क्यों डरते हैं तुम से लोग

ज़िंदगी मे तुम जैसी कशिश तो नहीं

फिर तुम हर किसी की ख़्वाहिश क्यों नहीं

क्यों ये जतन सब का कि तुम्हारा सामना न हो

ऐसा क्यों कि हर मन मे तुम्हारी कामना न हो

एक अलग ही अंदाज़ लिए वो पलकें झुका कर मुसकुराई

कुछ ठहराव लिया उसने फिर धीरे से बात बताई

ज़िंदगी बेकरारी मैं क़रार हूँ

ज़िंदगी रास्ता मैं मंज़िल हूँ

ज़िंदगी तड़प मैं सुकून हूँ

ज़िंदगी कर्म मैं परिणाम हूँ

ज़िंदगी अनंत मैं अंत हूँ

ज़िंदगी सवाल मैं जवाब हूँ

ज़िंदगी मिथ्या मैं सत्य हूँ

ज़िंदगी कठिन मैं सरल हूँ

ज़िंदगी धोखा मैं विश्वास हूँ

ज़िंदगी अनिश्चित मैं निश्चित हूँ

पर बस यहीं आकर मैं ज़िंदगी से हार जाती हूँ

ज़िंदगी चलने का नाम है और मैं ठहर जाती हूँ

प्रणय