जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

फिर क्या था मेरा दिल अपना किया उन्होने

 

कश्मीरी सेब से उनके लाल लाल गाल

पूनम के चाँद का रंग फीका किया उन्होने

 

राजस्थानी ठाठ सी उनकी चाल लाजवाब

इस चाल पर लाखों को कुर्बान किया उन्होने

 

दिल्ली की स्टाइल , मुंबई का उनमे ग्लैमर

एट्टीट्यूड पर कितनों को चलता किया उन्होने

 

मस्ती है उनमे जैसे भांगड़ा पंजाबी

धड़कने बढ़ गयी जब गिद्दा किया उन्होने

 

अदाएं है उनमे इतनी जितनी हैदराबाद मे बिरयानी

आ कर स्वादमहफिल बढ़ा दिया उन्होने

 

झील सी उनकी आंखे जैसे केरल का ठहरा पानी

देखा जिस को प्यार से डूबा दिया उन्होने

 

MP के जंगलों सी ज़ुल्फें उनकी घनेरी

जो हो गया इसमे गुम, भटका दिया उन्होने

 

उनकी मीठी बातें जैसे बंगाल की मिठाई

इन बातों के आगे गुड़ को खट्टा किया उन्होने

 

और तारीफ क्या करूँ मैं, दुनिया बहुत है छोटी

नज़ाराखूब दुनिया दिखा दिया उन्होने

 

प्रणय

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