चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

करें बगावत अपनी ज़िद पर अड़ के देखें

आज चने के झाड पर चड़ के देखें

सुधर के भी देखा हमने ज़माने को

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

मिसाल तो फिर भी रहेगी बदनाम हुये तो क्या

वनवास तो जाना ही है फिर राम हुये तो क्या

तो कन्हैया से सीख रास लीला कर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

दुनिया क्या कहेगी किस को फिकर है

दुनिया की कहाँ कोई सुधरी नज़र है

चलो अब नरमी छोड़ें कुछ अकड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

कभी तो शर्म की सरहद बताई

तो कभी उम्र की भी दी दुहाई

अब उम्र कुछ हो हद से आगे बड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

अभी अभी तो निकले हैं पर ये मस्तियों के

अभी अभी तो हुये हैं जलवे अपनी हस्तियों के

चलो उड़ें आसमान मे हवा से लड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

फिर न कहना ज़िंदगी मे हाथ क्या आया

दोनों हाथ थे खाली तुमने तिनका उठाया

दोनों मुट्ठियों मे इस जहां को भर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

प्रणय 

1 Comment

  1. nice to read your thoughts after such a longtime… दुनिया क्या कहेगी किस को फिकर है

    दुनिया की कहाँ कोई सुधरी नज़र है.. true lines :)

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