बहलाने को दिल तेरा

चलो कुछ गुन गुनाता हूँ कोई नगमा सुनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

बस यूं ही रखना तू मुस्कान होठों पर

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

तेरी आँखों सी गहराई लिए कुछ खास लब्जों से

तेरे होंठों सी लाली लिए कुछ सुर्ख रंगों से

तेरी हिरनी जैसी चाल से, लहराते से रेशम बाल से

कहता हूँ कहानी कोई, तेरी झुकती पलकों से

अदाओं सी तेरी मैं कोई सरगम बनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

चाँद तारे तोड़ने का वादा नहीं करता

अपनी जान दे दूँ प्यार मे ये इरादा नहीं करता

ताज़ महल बनवाने की जरूरत नहीं मुझको

काम कोई मैं कभी आधा नहीं करता

बाहें फैला के हाल ए दिल तुझको बताता हूँ

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

प्रणय