रोया, हंसा, खिल-खिलाया

रोया, हंसा, खिल-खिलाया

ऊँगली पकड़ के चला,
गिरा, उठा ,फिर चला
सुनना,बोलना,पढना सीखा
कही फेल हुआ कही पास

रिश्ते बनाये, दोस्त भी
कुछ निभाए कुछ भुलाये
किसी को याद किया
कभी पाया कभी खोया

कभी अपनों को दूर जाते देखा
किसी अजनबी को पास आते देखा
कभी उम्मीद से परे मिला तो
कभी तमन्नाओं को टूटते देखा

लिखे-उतारे दिल में
जिंदगी के कुछ अनकहे तथ्य
कुछ मीठे झूठ, कुछ कटु सत्य
कुछ सीखा दूसरों की गलतियों से
कुछ बड़ों की सीख से
कुछ खुद की ठोकर से

इतना कुछ तो किया ज़िन्दगी में
जब थक के बैठा तो चेहरे पर मुस्कान थी
पर जब मुट्ठी खोली तो हाथ खाली
तो कहाँ गयी वो सीख
वो अनुभव, एहसास, वो ख्वाबों की दौलत

ढूंढा यहीं कहीं आस-पास
अभी तो था सब कुछ, गया कहाँ

फिर मिली
एक छोटी सी चीज़
एक छोटी सी बात
एक छोटा सा सच
यही सब तो जिंदगी है कि “मैं रोया, हंसा, खिल-खिलाया”

प्रणय

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ये Love Marriage है भाई !

जब हुआ पच्चीस का तो गया पापा के पास
और की वो बातें जो करनी थी हमको ख़ास
धीरे से हमने उनको दिल की बात बताई
जेब से निकाल कर लड़की की फोटो दिखाई
करता हूँ मैं प्यार इस से, करवा दो मेरी शादी
खाना भी वो बना लेती है लड़की सीधी-सादी
मान गए है उसके मामा, बुआ और चाचा-चाची
मियां-बीवी भी राज़ी हैं फिर आप क्यों बनते काजी
और इसके आगे तुमको हम क्या बताएं
बस तुम्हारे दिमाग से एक संदेह हटायें
मांगी तो थी हमने उनसे एक प्यारी सी लुगाई
पर कुछ दिन में ही समझ आ गया ये love marriage  है भाई

सुबह उठते ही चाय बनाओ और बिस्तर पर उसे पिलाओ
9 बजे नाश्ता बनाओ भागे दौड़े ऑफिस जाओ
रोज़ शाम को घर पर आकर करो कपड़ों की धुलाई

बच्चों की है चड्डी बदलना उसके बाद तेल है मलना
अब थोड़ी सी आगे चलना किचन में है पुरियां तलना
बर्तन मांजे, सब्जी काटी देता रो-रो दुहाई

शौपिंग काम्प्लेक्स , ब्यूटी पार्लर रोज़ है उसको जाना
अपने घर में गढ़ा है जैसे कोई कुबेर का खजाना
अपनी तो है भाई एक मजदूर जैसी कमाई

आज़ादी सब छीन जाती है हर पल वो दिमाग खाती है
प्यार से कहती है सुनते हो जी बस फिर पीछे पड़ जाती है
झाड़ू और बेलन से अब तो डर लगता है भाई

पहले महीने तो लगती थी वो सोने की गुडिया
बस दुसरे ही महीने से हो गयी आफत की पुड़िया
जिसको समझा प्यार वो निकला हरजाई
कुछ दिन में ही समझ आ गया ये Love Marriage  है भाई

प्रणय

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