कुछ लोग जिन्हें फर्क नहीं पड़ता !

मै नहीं जानता वे कौन लोग हैं
कुछ होने पर जिन्हें फर्क पड़ता है जिन्हें नहीं !

किसान राम लाल नहीं जनता climate crisis को
पर उसे पता है कि इस बार पानी नहीं आया तो कर्जा नहीं चुकेगा !

चार साल का गरीब मोहन नहीं जनता recession को
पर उसे पता है कि बापू को आज काम नहीं मिला तो आज भी वो भूखा सोयेगा !

बूढी सावित्री बाई नहीं जानती global warming को
पर उसे फ़िक्र है इस बार फिर बाढ़ का पानी घर में घुसेगा !

रेडी वाला मुन्ना नहीं जनता किताबों की कीमत
पर उसे पता है उसका हर पन्ना समोसे बेचने के काम आएगा !

बूढ़े दादू को कोई मतलब नहीं valentine day से
पर उसे पता है उसकी बूढी बीवी आखरी सांस तक उसका साथ देगी !

झुग्गी वाला रघु अनजान है peter england और levi’s से
पर उसे पता है उसकी कमीज़ फटने पर तीन लंगोटी उसके बच्चों की बनेगी !

चंदू को क्या पता CCD और barista क्या है
पर उसे पता है चाय को मीठा करने के लिए आज फिर मंदिर के प्रसाद कि चिरोंजी डलेगी !

हरीश को क्या करना के nasa ने किस तारे कि खोज की
पर उसे पता है शहर से दूर किसी कालोनी में सब्जी बेचूंगा तो अच्छे दाम मिलेंगे !

नत्थू नहीं जनता body language और PD क्या है
पर उसे पता है कि उसकी खरी कमाई का थोडा सा सत्तू भी उसकी माँ को खुश कर देगा !

गीता को कोई मतलब नहीं अल-कायदा , उल्फा और लिट्टे से
पर उसे पता है कि इस महीने भी मकान का किराया नहीं दिया तो मालिक कि गाली सुनना पड़ेगी !

ये वो लोग हैं जो दुनिया में कुछ नहीं जानते ! शायद !
ये वो लोग हैं जिन्हें हम कुछ नहीं मानते ! शयद !

पर हाँ ये वो लोग हैं जिनका कर्जा चुकने पर
अपने आप को दुनिया का राजा महसूस करते हैं
ये वो लोग हैं जिन्हें सिर्फ खाना मिलने पर आई मुस्कान
सबसे अनोखी होती है
ये वो लोग हैं जिनका सबसे बड़ा धन
अपने परिवार का भरोसा है
ये वो लोग हैं जो छोटी-छोटी बातों में
ख़ुशी के बड़े-बड़े पल ढूंढ़ लेते हैं

इन लोगों में एक माँ है जो अपने मुह का निवाला
भी अपने बच्चों को दे देती है
इन लोगों में एक बाप है जो खुद खुले बदन रह कर
अपने बच्चों के लिए कपडे लाता है
इन लोगों में एक पत्नी है जो थकने के बाद भी
कुछ देर अपने पति का सर दबाती है
इन लोगों में एक पति है जो हर एक पल
हर निर्णय में अपनी बीवी पर विश्वास करता है
इन लोगों में एक बच्चा है जो अपने माँ=बाप को
बढ़ा होकर हर सुख देने का सपना दिखाता है

उस सपने को मै जनता हूँ, आप जानते हैं
पर इन लोगों को कोई नहीं जनता !

प्रणय

18 Comments

  1. प्रणय जी,
    पहली बार आपको पढ़ा है. बहुत उत्कृष्ट सोच और लेखनी. ये कुछ ख़ास आम लोग हैं शायद ८०% से भी ज्यादा जिनकी दुनिया में चाँद तक पहुँचने से ज्यादा ज़रूरी है कि चाँद सी एक रोटी हलक में उतर जाए. बहुत गंभीर विषय पर सार्थक लेखन. शुभकामनाएं. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए ह्रदय से आभार.

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