हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

क्या बात है
हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

कुछ खता हम से हुई
या उनका ये अंदाज़ है !

रूठने की आदत से
आते कहाँ वो बाज़ हैं !

ये गुस्सा है या कोई
उनकी अदा का राज़ है !

हम तो मना कर थक गए
अपने गुस्से पे उनको नाज़ है !

उनकी ये खामोशियाँ
कहना चाहती अलफ़ाज़ हैं !

गुस्से में मुस्कुराना जैसे
धीरे से छेड़ा साज़ है !

चाहते हैं रूठना
या प्यार का आगाज़ है !

क्या बात है
हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

प्रणय

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