तुम ये न जान पाए(उत्तर)

लबों की बातों को आँखों से बताया
मेने तो दिया इशारा, तुम ये न जान पाए

देखते हो मेरी आँखों की बेताबी
इंतज़ार है किसी का ये भी जानते हो
आँखों ने हरदम तुमको ही निहारा, तुम ये न जान पाए

देखती हैं आँखे मेरी जो तुमको
आँखों से नशा छलकता भी तो है
उस छलकते नशे को तुम भी तो पी रहे हो
तुम मदिरा का पिटारा तुम ये न जान पाए

मेरी परवाह और मेरी कुर्बान निगाहों को
चलो कम से कम जाना तो तुमने मेरी साँसों को
ये जान लो मेरे दिल की धड़कन भी है तुम्हारी
चूड़ी की खनक, पायल की छन-छन भी है तुम्हारी
तुम बिन सिंगार क्या हमारा तुम ये न जान पाए

ख्वाबों, खयालों, बातों और अदाओं में
चाहत, राहत और इबादत की दुआओं में
तुम ही तो समाए हो ये कैसे जताऊँ मै
खुली किताब है दिल अब क्या-क्या छुपाऊँ मैं
दिल के किसी कोने मे, मैं भी तो तुम्हारे हूँ
पर तुम्हे पहल नहीं गवारा तुम ये न जान पाए

प्रणय

मैं कैसे मानूं ?(प्रश्न)

लबों से कहो या कोई इशारा तो दो
तुम्हे मुझ से प्यार है मैं कैसे मानूं ?

कभी तो बताओ कौन है ज़हन में
इंतज़ार में जिसके तुम आँखें बिछाती हो
मेरा ही इंतज़ार है मैं कैसे मानूं ?

देखती है आँखे तुम्हारी जो मुझको
इन आँखों में नशा कुछ बढ़ सा जाता है
नशे की लत है तुम्हे भी किसी के
पर ये मेरा ही खुमार है मैं कैसे मानूं ?

ये माना तुम्हारी परवाह है मुझ पर
ये माना कुर्बान निगाह है मुझ पर
सांसों में तुम्हारी रहता हूँ मैं ही
धड़कन में तुम्हारी धड़कता हूँ मैं ही
मेरे लिए ही ये सिंगार है मैं कैसे मानूं ?

रातों के ख्वाबों में, दिन के खयालों में
दबी सी बातों में, उलझे सवालों में
दिल की तमन्ना में, बेकरार चाहत में
यादों की फुर्सत में, बैचेन राहत में
इबादत में की गयी प्यारी दुआओं में
मैं ही शुमार हूँ मैं कैसे मानूं ?

प्रणय

मौसम का असर है !

आसमान पर नज़र है, दिल आज बेखबर है !
नशे में ये शहर है या मौसम का असर है !

ये रंगीन तबियत, कुछ डोली सी नियत
और मस्त ये सफ़र है !

ये मस्ती में पंछी, ये लहराता माझी
ये झूमता शज़र है !

ये बादल की दस्तक, हवाओं की हिम्मत
मदहोश हर लहर है !

ये औंस की बूंदें, हर कली आँखें मूंदें
कि भंवरा किधर है !

लहराती लौ है, महकाती जौ है
वो मीठी मटर है !

वो दादी वो नानी वो लम्बी कहानी
अभी रात अभी सहर है !

वो प्यारी सी थपकी, वो छोटी सी झपकी
माँ की गोदी का घर है !

शायद ! मौसम का असर है !

प्रणय

कुछ लोग जिन्हें फर्क नहीं पड़ता !

मै नहीं जानता वे कौन लोग हैं
कुछ होने पर जिन्हें फर्क पड़ता है जिन्हें नहीं !

किसान राम लाल नहीं जनता climate crisis को
पर उसे पता है कि इस बार पानी नहीं आया तो कर्जा नहीं चुकेगा !

चार साल का गरीब मोहन नहीं जनता recession को
पर उसे पता है कि बापू को आज काम नहीं मिला तो आज भी वो भूखा सोयेगा !

बूढी सावित्री बाई नहीं जानती global warming को
पर उसे फ़िक्र है इस बार फिर बाढ़ का पानी घर में घुसेगा !

रेडी वाला मुन्ना नहीं जनता किताबों की कीमत
पर उसे पता है उसका हर पन्ना समोसे बेचने के काम आएगा !

बूढ़े दादू को कोई मतलब नहीं valentine day से
पर उसे पता है उसकी बूढी बीवी आखरी सांस तक उसका साथ देगी !

झुग्गी वाला रघु अनजान है peter england और levi’s से
पर उसे पता है उसकी कमीज़ फटने पर तीन लंगोटी उसके बच्चों की बनेगी !

चंदू को क्या पता CCD और barista क्या है
पर उसे पता है चाय को मीठा करने के लिए आज फिर मंदिर के प्रसाद कि चिरोंजी डलेगी !

हरीश को क्या करना के nasa ने किस तारे कि खोज की
पर उसे पता है शहर से दूर किसी कालोनी में सब्जी बेचूंगा तो अच्छे दाम मिलेंगे !

नत्थू नहीं जनता body language और PD क्या है
पर उसे पता है कि उसकी खरी कमाई का थोडा सा सत्तू भी उसकी माँ को खुश कर देगा !

गीता को कोई मतलब नहीं अल-कायदा , उल्फा और लिट्टे से
पर उसे पता है कि इस महीने भी मकान का किराया नहीं दिया तो मालिक कि गाली सुनना पड़ेगी !

ये वो लोग हैं जो दुनिया में कुछ नहीं जानते ! शायद !
ये वो लोग हैं जिन्हें हम कुछ नहीं मानते ! शयद !

पर हाँ ये वो लोग हैं जिनका कर्जा चुकने पर
अपने आप को दुनिया का राजा महसूस करते हैं
ये वो लोग हैं जिन्हें सिर्फ खाना मिलने पर आई मुस्कान
सबसे अनोखी होती है
ये वो लोग हैं जिनका सबसे बड़ा धन
अपने परिवार का भरोसा है
ये वो लोग हैं जो छोटी-छोटी बातों में
ख़ुशी के बड़े-बड़े पल ढूंढ़ लेते हैं

इन लोगों में एक माँ है जो अपने मुह का निवाला
भी अपने बच्चों को दे देती है
इन लोगों में एक बाप है जो खुद खुले बदन रह कर
अपने बच्चों के लिए कपडे लाता है
इन लोगों में एक पत्नी है जो थकने के बाद भी
कुछ देर अपने पति का सर दबाती है
इन लोगों में एक पति है जो हर एक पल
हर निर्णय में अपनी बीवी पर विश्वास करता है
इन लोगों में एक बच्चा है जो अपने माँ=बाप को
बढ़ा होकर हर सुख देने का सपना दिखाता है

उस सपने को मै जनता हूँ, आप जानते हैं
पर इन लोगों को कोई नहीं जनता !

प्रणय

छन-छन पायल धक-धक धड़कन

चंचल गोपी नृत्य निराला, कान्हा मन ललचाए
छन-छन पायल धक-धक धड़कन सब घुलमिल हो जाए

बजे बांसुरी शांत पवन में, सुन्दर मुख या माया
स्वच्छ लालिमा पूर्व दिशा में पीताम्बर है छाया
कदम्ब के पत्तों से जब छन-छन किरणे आये
छन-छन पायल धक-धक धड़कन सब घुलमिल हो जाए

राधा के नैनों सा रंग लिए तन-मन में
रास रचाए कन्हय्या, राधा मन आँगन में
हिरनी सी जो चले राधिका , नदिया सी लहराए
छन-छन पायल धक-धक धड़कन सब घुलमिल हो जाए

हरी चूड़ियाँ, शिखा है लम्बी, ह्रदय अटूट ये बंधन
राधा का कण-कण है अर्पित, कृष्ण भाल का चन्दन
श्याम मेघ जो देख-देख कर, मयूर मन मुस्काए
छन-छन पायल धक-धक धड़कन सब घुलमिल हो जाए
प्रणय

हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

क्या बात है
हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

कुछ खता हम से हुई
या उनका ये अंदाज़ है !

रूठने की आदत से
आते कहाँ वो बाज़ हैं !

ये गुस्सा है या कोई
उनकी अदा का राज़ है !

हम तो मना कर थक गए
अपने गुस्से पे उनको नाज़ है !

उनकी ये खामोशियाँ
कहना चाहती अलफ़ाज़ हैं !

गुस्से में मुस्कुराना जैसे
धीरे से छेड़ा साज़ है !

चाहते हैं रूठना
या प्यार का आगाज़ है !

क्या बात है
हुजुर हम से इस कदर नाराज़ हैं !

प्रणय