एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं

चलें तोड़ें बंधन, कहीं घूम के आते हैं
एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं

रख लेना सामान कुछ दैनिक कोई पुरानी किताब
कुछ सिक्के भी रखलेना खरीदने को ख्वाब
कह देना आस-पड़ोस में , जा रहे हैं
कुछ तीन या चार पलों में वापस आरहे हैं
मन घुमक्कड़ उठ चला है लाद कर बेग पीठ पर
जा बैठा है शान से तमन्नाओं की सीट पर

सब कुछ है फिर भी कुछ तो ले आते हैं
हम भी कहीं कोई निशाँ छोड़ आते हैं
एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं

देखेंगे दुनिया और कुछ उतार-चढाव इसके
ये भी देख आयेंगे, चाँद पर हैं पाँव किस के
जहाँ दोस्त भी होंगे कुछ अपने भी होंगे
जो देखे थे नींद में वो सपने भी होंगे
जहाँ बादल भी हाथों के निचे आ जाएँ
जहाँ समंदर बाहें फैला के बुलाए

चलो राहों के पीछे कुछ लकीरें बनाते हैं
पीछे आने वालों को किस्से सुनते हैं
एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं

चलो चलते हैं वहां जहाँ पतझड़ में भी फूल खिलते हों
जहाँ बच्चों की मुस्कान, बड़ों से प्यार मिलते हों
सब जगह खुशियाँ फैली है चलो कुछ बटोर लायें
कुछ पहाड़ों की खामोशियाँ कुछ सागर का शोर लायें
सुना है बहुत खुबसूरत है जग ये
बहुत लम्बा सफ़र है और छोटे हैं पग ये

तो चलो हम भी कोई short cut अपनाते हैं
इन पलों को कहीं दीवारों पर सजाते हैं
एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं
प्रणय

This post is written as an entry for the Around the world with Expedia contest, held by IndibloggerExpedia.

16 Comments

  1. प्रणय जी ,शब्दों और संवेदनाओं के संग प्रणय का प्रसंग एक संपूर्णता का अहसास दे गया |
    कुछ पंक्तियाँ मानस में उभर आईं

    कुछ भूले बिसरे पल हमें बुलाते हैं
    कुछ तन्हा साये आवाज़ लगाते हैं
    उसकी आँखों में देखा था एक शहर हमने
    चलो आज वहीं घूम आते हैं
    एक जगह जो रह गयी थी उसे आजमाते हैं

  2. सुना है बहुत खुबसूरत है जग ये
    बहुत लम्बा सफ़र है और छोटे हैं पग ये

    तो चलो हम भी कोई short cut अपनाते हैं
    इन पलों को कहीं दीवारों पर सजाते हैं
    एक जगह जो रह गयी उसे आज़माते हैं

    बहुत बहुत सुन्दर….आपका लेखन बहुत अच्छा है…
    loved it…
    regards.

    बहुत बहुत सुन्दर….

  3. बहुत सुंदर रचना प्रणय जी… सिक्के रख लेना खरीदने को ख़्वाब.. या फ़िर पहाड़ों की खामोशियाँ और सागर का शोर… और पलों को दीवारों पर सजाने की कल्पना बहुत ही ख़ूबसूरत लगी… बेमिसाल रचना के लिए बधाई…

    कुछ भूले बिसरे सपने,
    जो छूट गये वो अपने
    दिल के बेहद करीब
    बेनामी से कुछ रिश्ते
    उनको भी मिल आते हैं
    फ़िर से ख़ुद को अजमाते हैं

    सादर
    मंजु

  4. प्रणय जी कविता प्रशंसा करने के लिए शब्द पर्याप्त नहीं होंगे,जब भाव इतने घनीभूत हो तो मौन ही रहना चाहिए

  5. सुना है बहुत खुबसूरत है जग ये
    बहुत लम्बा सफ़र है और छोटे हैं पग ये

    seriously true :) kuch v padhne me tabh maja aata h… jab aap uss lekhni me khud ko dhund sako :) nice one mr pranay :)

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