प्रणय दिवस

ये प्रणय दिवस की सुबह प्रणय
ये क्षितिज और सूरज का प्रणय

ये देख-देख मन हर्षाता
हर कोई आज तो है भाता
ये फूल और भंवरे का प्रणय
ये तट से है लहरों का प्रणय

हर कोई प्रफुल्लित, आनन्दित
मुस्कान है हर चेहरे पर उदित
ये चकोर और चंदा का प्रणय
ये प्यासे और पानी का प्रणय

ह्रदय की संतुष्टि से ऊपर
मन के अरमान तो हैं नभ पर
ये सीप से स्वाति का प्रणय
ये धागे से मोती का प्रणय

ये सृष्टि का है रचनाकार
तुमको मुझको दिया आकार
ये कुम्हार से चाकी का प्रणय
ये हाथों से माटी का प्रणय

ये जिज्ञासा, ये उत्सुकता
मन की मासूम सी व्याकुलता
ये मन से है एक मन का प्रणय
ये ह्रदय से एक ह्रदय का प्रणय

ये बातों से बातों का प्रणय
ये आँखों से आँखों का प्रणय
ये अधरों से अधरों का प्रणय
ये जीवन से जीवन का प्रणय

ये सत्य, भेद या है विस्मय
सृष्टि का आरम्भ प्रणय
और सृष्टि का अंत प्रणय
प्रणय

7 Comments

  1. ये सृष्टि का है रचनाकार
    तुमको मुझको दिया आकार
    ये कुम्हार से चाकी का प्रणय
    ये हाथों से माटी का प्रणय

    awosome lines…. :) aapke sabdo me dikha pranay ka swayam se pranay

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