शांति रखो ना यार

हम गुस्सा है
कभी खुद पर
कभी अपनों पर, कभी दूसरों पर
कभी भगवान् पर कभी किस्मत पर
हम चिल्लाते हैं चीजों पर अक्सर बार-बार
और फिर भी सब से कहते हैं, शांति रखो ना यार

हम नेताओं से गुस्सा हैं,भ्रष्टाचारों से गुस्सा हैं
हम मंदिर के पास पड़े कुछ लाचारों से गुस्सा हैं
पडोसी के कचरा फेंकने की आदतों से गुस्सा हैं
सड़क पर चलने वालों की पिचकारी से गुस्सा हैं
बिजली कटने से गुस्सा हैं,टायर फटने से गुस्सा हैं
चाबी घुमने से गुस्सा हैं, बच्चों के न सुनने से गुस्सा हैं

हम ठोकर लगने पर भी गाली बकते हैं लगातार
और फिर भी सब से कहते हैं, शांति रखो ना यार

हम गुस्सा हैं
बस में कभी सीट के लिए,लाइन में कभी टिकिट के लिए
खुल्ले के लिए ऑटो वाले से,ट्राफिक जाम में आगे वाले से
कभी बीवी की तकरार से, कभी क्रिकेट टीम की हार से
कभी exam के result से, कभी assignment की मार से
कभी गर्लफ्रेंड के फ़ोन ना उठाने से, कभी दोस्तों के झूठे बहाने से
कभी दाल में नमक कम होने से, कभी सब्जी में ज्यादा नमक मिलाने से
कभी पकिस्तान की हरकतों से , कभी जेल में बंद कसाब से
कभी भविष्य की चिंता से, कभी अधूरे छूटे ख्वाब से
किसी news channel की बकवास से, dry day पर लगी प्यास से
कभी डकबर्थ लुईस के rule से, कभी न्यूटन, पाइथागोरस और गॉस से

पहले धैर्य,धीरज,शांति और ढूंढ़ ले थोडा प्यार
फिर कहेंगे मिलकर सब, शांति रखो ना यार
प्रणय

12 Comments

  1. Bhai dry day par lagi pyaas ke liye to thand rakhne ke alawa koi upay nahi..bhale he doosre din toot pade botttlo par…
    bahuut badiya kavita hai Pranay…vaise ek baat notice ki Humare desh mei sabse zyaada shanti rakhiye kahan kaha jaata hai…jee haan humare parliament mei..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s