इंसानों की भीड़ में हम इंसान ढूंढते है

इंसानों की भीड़ में हम इंसान ढूंढते है
खुद को ही खो के अपनी पहचान ढूंढते है

दिल में छिपे है शोर सारे ज़माने के
हम थोड़ा सा सुनसान एक जहान ढूंढते है

कुछ मस्तियाँ रखी है मुट्ठी में लुटाने को
जो लूट ले इनको वो नादान ढूंढते है

जहाँ तक गयी नज़रें लगे सब जाने-पहचाने
हर चेहरे में शख्स एक अनजान ढूंढते है

तुम्हारे चेहरे की मुस्कान कहीं खो गयी है शायद
हर कहीं अब वही मुस्कान ढूंढते है

सब ही तो ढूंढते है कुछ न कुछ यहाँ पर
हम ही नहीं अकेले जो सरे-आम ढूंढते है
प्रणय

6 Comments

  1. हर चेहरे में शख्स एक अनजान ढूंढते है

    loved it to the core…. my hindi dictationary is not very good but truely amazing…
    we all are passing thru that state … why, i dun know.. still trying to get answer for it..

    you rock bro…

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