एक छोरी गोरी गट्ट

एक छोरी गोरी गट्ट, उसके गाल लाल चट्ट
हैं आँखें नीली नट्ट, हमको पसंद आ गयी फट्ट

इतराती, शर्माती है ,नदिया सी लहराती है
लटके,झटके,नखरे और कितने भाव दिखाती है
होगी वो कोई सोणी कुड़ी मै भी पंजाबी जट्ट
एक छोरी गोरी गट्ट,हमको पसंद आ गयी फट्ट

उसका भाई है हट्टा-कट्टा रामू पहलवान का पट्ठा
एक जेब में रामपुरी है एक में देसी कट्टा
बाप है उसका मोटा तगड़ा और काला कट्ट
एक छोरी गोरी गट्ट,हमको पसंद आ गयी फट्ट

उसकी जुल्फें काली-काली,उसकी सोने की वो बाली
उसकी खिड़की की वो जाली,उसकी मीठी-मीठी गाली
पर मंदिर में धीरे-धीरे राम-राम की रट्ट
एक छोरी गोरी गट्ट,हमको पसंद आ गयी फट्ट

मदिरा सी वो छलक-छलक,मिल जाये उसकी एक झलक
जब पर्दा करती है पलक,लगती है वो सबसे अलग
पूछा उससे हाल तो शरमा के कहती है हट्ट
एक छोरी गोरी गट्ट ,हमको पसंद आ गयी फट्ट
प्रणय

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