मुस्कुराइए

जिंदगी के दुखों से न घबराइए
मुस्कुराइए
किसी गम का बोझ दिल पर न उठाइए
मुस्कुराइए

चार दिन की ज़िन्दगी है , दुनिया है हसीन
आदमी इन्सान से हो रहा मशीन
मशीन को थोडा सा चमकाइये और
मुस्कुराइए

समय जो आया ही नहीं चला जायेगा
खेत को चिड़िया नहीं गधा खायेगा
डंडा उठा के गधे को भगाइए और
मुस्कुराइए

थोड़ी सी जवानी है मौज तू कर ले
हरीयाली है दुनिया में जल्दी से चर ले
मुट्ठी है खाली तो भर के लाइए और
मुस्कुराइए

बचपन में बहुत चाकलेट है खाई
जवानी में मंजन किया नहीं भाई
बुढ़ापे में नयी बत्तीसी लगाइए और
मुस्कुराइए

आये मुसीबत तो टेंशन न लेना
उधार ले लेना वापस न देना
उधार के पैसों की बिल्डिंग बनाइये और
मुस्कुराइए

लैला-मजनू राँझा-हीर भी हुए
कुछ हुए आमिर कुछ फकीर भी हुए
इन चक्करों में अब न माथा खापाइए अरे
मुस्कुराइए

गम ढूंढने वालों को गम मिल ही जायेगा
एक न एक दिन वो सनम मिल ही जायेगा
हम तो है लाईन में,आप भी आइये और
मुस्कुराइए

सूट-बूट पहन कर हो कर तैयार
छेड़ना हो लड़की तो जाओ तुम बाज़ार
अब लड़की पर अपनी आँखें गढ़ाइए और
मुस्कुराइए

सर दुःख रहा हो तो गाने सुन ले
मेरी बात गौर से दीवाने सुन ले
FM पर रेडिओ मिर्ची चलाइए और
मुस्कुराइए

चिडने वाले तो चिडते ही रहेंगे
जलने वाले भी जलते ही रहेंगे
अपने अच्छे मूड को यूँ न भुनाइये ज़रा
मुस्कुराइए

मुस्कुराने वाला होता नहीं उदास
चाहे सुननी पड़े कितनी भी बकवास
बकवास को भी एक चुटकुला बनाइये और
मुस्कुराइए

मुस्कुराने से आपका कुछ न जायेगा
चोर भी न इसको चुरा पायेगा
गोरे-गोरे गाल में गड्डे बनाइये और
मुस्कुराइए
प्रणय

कागज की कश्ती ले के चले है !

इस बहती नदी सी जिंदगी में हम 
कागज की कश्ती ले के चले है !
दुनिया की भीड़ में चलना है मुश्किल 
हम एक खोयी सी हस्ती ले के चले है !

ज़माना बुरा है कहा था कभी माँ ने
पापा ने कहा एक रेस है दुनिया
कीमत है ज्यादा हर चीज़ की यहाँ पर
और हम बाते कुछ सस्ती ले के चले है !

आँखों में वैसे तो सपने थे ऊँचे
चाहत की दुनिया को भी था सजाया
वैसे तो जिए हम अपने ही लिए पर
कुछ चाहत जबर्दस्ती ले के चले है !

कल की चिंता में आज को गवाया
ऊँचा उठने की चाहत में गिरते गए बस
जो पाप थे कल, अब पहचान है अपनी
हम बेईमानों की बस्ती ले के चले है !

न खेले कभी जी भर के आँगन में अपने
न सोये जी भर के सर्दियों की धुप में
चलते गए हर दम, एक भार उठा के
बस मंजिल परस्ती ले के चले है !

कभी आग से ठंडक मांगी थी हमने
कभी पत्थर निचोड़ कर पानी निकाला
सागर से निकाले मोती थे फिर भी
कहाँ मौजों की मस्ती ले के चले है !

इस बहती नदी सी जिंदगी में हम 
कागज की कश्ती ले के चले है !
                             प्रणय

valentine day

valentine day पर लड़की को देने गया था फूल
दिल में था जोश भरा और mood था cool
पहले तो bus stop पर उसका इंतज़ार किया
कांच में देख-देख कर बार-बार श्रृंगार किया
जब उसके साथ किसी और को देखा 
रह गया हक्का-बक्का
अपनी पहली ball पर ही जैसे 
पड़ गया हो छक्का
उसे छोड़ दूसरी लड़की पर हमने आँखे टिकाई
दूकान से उधारी में गुलाब की कली उठाई
उसके साथ चल दिया अब में रेस्टोरेंट
ठंडी थी पर्स की जेबें और खाली थी पेंट
फ़िल्मी स्टाइल में झुक कर हमने किया प्यार का इज़हार
पर लड़कियों के मुह पर होता है हमेशा ही इनकार
हमने तो सब कुछ कह दिया अब उसकी थी बारी
इतने में बजरंग दल वालों ने कपड़ों की इस्त्री उतारी
कान पकड़ कर हम से उठक बैठक लगवाई
अखबार में छापने के लिए फोटो भी खिचवाई
लड़की से पूछा क्या ये है आपका रिश्तेदार
पर लड़कियों के मुह पर होता है हमेशा ही इनकार
कान पकड़ कर तौबा की किसी पर नहीं है मरना
बस ट्रेन और लड़की का इंतज़ार नहीं करना
ये आदमी को बन्दर सा नचाती है
बिंदास एक छोड़ दो दूसरी आ जाती है
                                     प्रणय

स्वादिष्ट कविता

कागज की कढाई लेकर स्याही का घी डाल दो
शब्दों की सब्जी को काटकर लय का थोडा तड़का मार दो
तुक के थोड़े मसाले डालो , हास्य का नमकीन नमक
उत्साह की आंच पर रख कर,आये जब उसमे चमक
कलम के चम्मच से उसे हिलाओ संवेदना की मिर्च मिलाओ
डायरी की थाली में परोसो और स्वादिष्ट कविता खाओ
                                             प्रणय

प्यार

जिसके पीछे पागल ये सारा संसार
हमे भी तो हो एक बार ये प्यार

कहते हैं जब होता है नींद उड़ जाती है
कहते हैं जब होता है तन्हाई सताती है
कहते हैं जब होता है याद बहुत आती है
कहते हैं जब होता है हवाएं भी गाती है

दिल पर चलती है मीठी सी कटार  
हमे भी तो हो एक बार ये प्यार

इस प्यार में चेहरा अपने आप खिल जाता है
इस प्यार में एक दिल, एक दिल से मिल जाता है
इस प्यार में मन हर बात से हिल जाता है
इस प्यार में हर शाम में रंग घुल जाता है

बस होता है हर पल किसी का इंतज़ार
हमे भी तो हो एक बार ये प्यार

सुना है तारे गिनने में मज़ा आता है
मन की हर बात लिखने में मज़ा आता है
रोज़ नया ख्वाब बुनने में मज़ा आता है
काँटों से गुलाब चुनने में मज़ा आता है

कभी लगता है सब कुछ अच्छा और कभी बेकार
हमे भी तो हो एक बार ये प्यार

आँखों की चमक दिखा देती है सबकुछ
चेहरे की रंगत बता देती है सबकुछ
वो चाल नशीली कह देती है सबकुछ
वो बातों की उलझन सुना देती है सबकुछ

वो शर्माना,मुस्काना और मीठी तकरार 
हमे भी तो हो एक बार ये प्यार
                                प्रणय

अच्छी लगती है !

पत्तों पर बारिश की बूंदें अच्छी लगती है !
तेरी भोली सी मीठी सी बातें अच्छी लगती है !

नथनी का वो छोटा सा हीरा
आँखों में जिसकी चमक है सुन्दर
उस पर ये प्यारी मुस्कान भी अच्छी लगती है !

पैरों में चाँदी की पायल
हाथों में वो लाल चूड़ियाँ
बालों की लम्बी सी चोटी अच्छी लगती है !

सावन में भीगी सी पलकें
आँखों में गहराई छलके
मन मोहक मासूम सी सूरत अच्छी लगती है !

कोमल कोमल बदन है तेरा
बोली है कोयल के जैसी
रूठ जाती है जब तू हम से अच्छी लगती है !

माथे पर दीपक सी बिंदिया
होंठों पर पूरब की लाली
चाल तेरी वो हिरनी जैसी अच्छी लगती है !
                                   प्रणय