मैं कुछ हूँ !

सब कुछ है इन हाथों में ,फिर भी चाहता कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ

नहीं मै जानता जीना ,नहीं मै जान सकता हूँ
फिर भी हाल कुछ हो होंठो पर मुस्कान रखता हूँ
बहुत सारे में थोडा हूँ , थोड़े में बहुत कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ

उम्मीदें ,तमन्ना सब मेरी जेबों में ठुंसी है
हलचल हो रही है जो ये उनकी कानाफूसी है
हाथो को फैला के चाहता कहना कि मै कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ

ये राहें भीड़ से भरी लेकिन खामोश फिर भी है
मदहोशी के आलम में थोडा होंश फिर भी है
आगे हो न हो ये बयां मेरा नाम कि कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ

कभी मै आसमान पर छोटी सी एक आस रखता हूँ
न जाने कौन सी दिल में हर दम प्यास रखता हूँ
कब मै रुक के दो पल चैन से कहूँगा कि हाँ कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ

कभी मै ख़ामोशी से हार का सम्मान करता हूँ
कभी मै मदहोशी में जीत पर अभिमान करता हूँ
नहीं मै जनता क्या हूँ ,कैसे हूँ ,कहाँ ,कुछ हूँ
कभी लगता है कुछ नहीं मै ,कभी लगता है मै कुछ हूँ
                                           प्रणय
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ये मजनू हैं !

ये मजनू हैं, ये रांझे हैं, रोमियों है ,फरहाद है ये
कुछ कहते है बर्बाद है ये, पर हम कहते आबाद है ये

गलियां इन से है रोशन ,बाज़ारों की रोनक है ये
हर राह,मोहल्ले,चौराहे,शापिंग माल्स की जान है ये
कुछ ख़ास ये इनकी निशानी है, सीटी है छेड़ाखानी है
चाहे बच्ची है या नानी है,हर बात में एक कहानी है
हर लड़की के दिल से निकली,एक छोटी सी फरियाद है ये
कुछ कहते है बर्बाद है ये, पर हम कहते आबाद है ये

पावडर, लिपस्टिक,परफ्यूम बिकते है इनके कारण ही
उदास-उदास चेहरे खिलते है इनके कारण ही
हर लड़की के बारे में इनका observation keen है
खूबसूरती की तारीफ़ न करना समझते ये तौहीन है
हर जुमले की,हर शायरी की वाह-वाह करती दाद है ये
कुछ कहते है बर्बाद है ये पर हम कहते आबाद है ये

ये तिल का ताड़ बनाते है, राई का पहाड़ बनाते है
चड़ना आये या न आये ,चने का झाड़ चढाते है
ये साहसी है ,ये अलबेले , ये हर खतरे से यूँ खेले
इनकी वाणी में जादू है और सूरत जैसे साधू है
ये हवा में उड़ते परिंदे है हर सरहद से आज़ाद है ये
कुछ कहते है बर्बाद है ये पर हम कहते आबाद है ये
                                         प्रणय

………प्यार नहीं है !

उसकी आँखों की गहराई ,जुल्फों का दीवानापन
उसके गालों की लाली , पायल की वो छान-छान
हर बात जैसे बात पहली बार ही की है 
पर मुझे उस से प्यार नहीं है

वो चलती है तो चलते है ज़मीन आसमान 
सुरमयी एक ग़ज़ल की मध्हम सी तान
बार-बार देखने को दिल है चाहता 
न सांसों का हिसाब है न धड़कन का पता
उसका हर झूठ भी लगता सही है
पर मुझे उस से प्यार नहीं है

ये बादल,झील, झरने,नदियाँ सब उसके दीवाने है
बहारें ,चांदनी,खुशबु ये सब उसके ठिकाने है
ये चलता वक़्त भी यूँ कभी ठहर जाता है
किसी बात में जब यूँ उसका ज़िक्र आता है
दिल के कोने में शायद वो कही है 
पर मुझे उस से प्यार नहीं है     
                                  प्रणय

आवारा

चला दिल तोड़ के एक दिल , कि धड़कन थी यूँ आवारा
रातों में जगा पल-पल , कि सपने भी थे आवारा
निगाहें बन गयी कातिल , कि नज़रे ही थी आवारा
ढूंढते रह गए महफ़िल, कि तन्हाई भी आवारा

मेरे दिल पे मेरे मन पे काबू कर लिया ऐसे
जैसे जाती है कलियाँ खिल, कि वो भंवरा है आवारा

मेरी तमन्ना वो, मेरी तक़दीर भी वो ही
वो मेरी राह और मंजिल, कि राही भी है आवारा

उसकी होंठो की लाली, चाल हिरनी सी क्या जादू है
गालों पे वो काला तिल , कि जुल्फें भी है आवारा

तुझे देखा तो धड़कन थम गयी, नज़रे न हट पाई
गए होंठ ऐसे सिल, कि हर जज्बात आवारा

मेरी बातों में वो है और मेरी सांसो में भी वो ही
वो ज़र्रे-ज़र्रे में शामिल , कि रोम-रोम है आवारा

उसकी आँखे है सागर और मेरा इश्क है लहर
वो लहरों का है साहिल , कि मेरा इश्क आवारा
                                    प्रणय

कोई इंतजार में है

कोई इंतजार में है मुझको आज जाना है

किसी चोखट पर बैठी है तकती है राहों को
उसके हाथों को थामुंगा रोकूंगा उन आहों को
सीने से लगकर ही चैन आएगा सांसो को
जाते हुए जो किये थे निभाना है उन वादों को

परवाह है मुझे उसकी, उसे ये बताना है
कोई इंतजार में है, मुझको आज जाना है

हर आहट पर चोंकेगी, सोचेगी की में आया
आंसू को छुपाएगी, आँचल का कर साया
मौसम हो कैसा भी, गम ही तो है छाया
जब से गया हु में, दिल ने चैन न पाया

उसका वो करार, वो चैन लौटना है
कोई इंतजार में है, मुझको आज जाना है

दिवाली का हर दिया हंस कर वो मेरे नाम कर देगी
दिल से निहारेगी, सुबह से शाम कर देगी
दिन रात आठो पहर ये तमाम कर देगी
उसके दिल को ठंडक मेरी एक मुस्कान कर देगी

इंतजार की इन्तेहाँ को अब मिटाना है
कोई इंतजार में है मुझको आज जाना है
                                 प्रणय

चाहत

चमन को बहार की, यार को यार की
सावन को मल्हार की, आसमान को आधार की 
हर इंसान को प्यार की
दूर गगन में अँधेरे से लड़ते तारे को रौशनी की 
चाहत .......

राहों को मंजिल की, लहरों को साहिल की
तन्हाई को महफ़िल की, एक दिल को एक दिल की
ताकती आँखों और रहो के बीच के आंसू को मुस्कान की
चाहत ........

मुझे उसकी उसे किसी और की
किसी और को किसी और की
ख़ामोशी को शोर की, अन्धकार को भोर की
पतंग को डोर की
खुली सीप को स्वाति की पहली बूँद की
चाहत .......

इंसान को सुकून की, सुकून को ख़ुशी की
ख़ुशी को मुस्कान की, मुस्कान को हर इंसान की
तडपते चकोर को चाँद की पहली किरण की
चाहत .......

पंछी को उड़ान की,उड़ान को आसमान की
आसमान को उम्मीद की,उम्मीद को विश्वास की
विश्वास को आस की 
हर आस को दिल से निकली एक चाहत की 
चाहत ........
                                   प्रणय

उसके नाम मेरे साथ सब ने लिख दिए

एक रात उसको सोच कर आँखों ने सपने लिख दिए
हमने कोरे कागज पर वो ख्वाब अपने लिख दिए

क्या याद है अब कुछ नहीं , बस याद है चेहरा वही
दिल की हर धड़कन पर अब जज़्बात हमने लिख दिए

किस्मत कहू उसको मेरी, या खुदा की खुदाई
कुछ कसमे कुछ वादे, उसके साथ रब ने लिख दिए 

बस याद है साकी की आँखों की वो गहराई
दिन ने लिखे कुछ जाम , कुछ जाम शब् ने लिख दिए

एक राह मै कह दू उसे या मान लू मंजिल मेरी
फ़साने यूँ मंजिल के आँखों की अदब ने लिख दिए

इज़हार भी किया , न होठों ने , न आँखों ने
जाने क्यों उसके नाम मेरे साथ सब ने लिख दिए

एक रात उसको सोच कर आँखों ने सपने लिख दिए
                                     प्रणय