ओ रे पिया आना कभी

ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे
बैठ कर बातें करेंगे कुछ पुरानी प्यार से

तेरी वो मोहिनी बातों में फिर से उलझा करूंगा मैं यूंही
तेरे चेहरे को तकते तकते खोया करूंगा मैं कहीं
तू जब ह्म्म्म कहेगी ठहराव लेकर कभी किसी बात पे
मेरे बेचैन हाथों को मैं रख दूंगा फिर तेरे हाथ पे

तेरे बिना कैसे जिया, कैसे रातें कटी तेरे बिना
ये बताऊँगा किसी बहाने से हर रात की बातें गिना
मुझे पता है तेरे पास भी किस्से बहुत हैं सुनाने को
मेरे दिल के पन्ने भी खाली हैं इन सबको लिखे जाने को

है जिंदगी ही वार दी बस तेरी आँखों के इकरार पे
ओ रे पिया आना कभी चुपके से मेरे द्वार पे

प्रणय

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नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

वो मज़ा नहीं किसी में जो आधे प्यार में है

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है 

जब चाँद आधा, हो रात भी आधी अधूरी 

तब रात रानी की महक होती बहार में है 

जब सीप की खिड़की हो थोड़ी अधखुली सी 

तभी बनता है मोती जो आपके हार में है 

ख्वाहिशे हो गयी पूरी तो मकसद क्या रहेगा 

ज़िन्दगी तो आधे चैन आधे करार में है 

जो आधा अधूरा, उलझा हुआ सा लग रहा है 

वही इंसान तो पूरी तरह से प्यार में है 

नशा मुलाकात से पहले के इंतज़ार में है !

प्रणय 

अब मिला हूँ तुम से

तुम्हे बताऊँ कितना इंतज़ार था मुझे
इस आने वाली घडी से कितना प्यार था मुझे
जब आया है ये वक़्त तो गवाऊँ कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

नाउम्मीद ना होने दिया इस दिल को मेने
किस तरह ढूंढा है साहिल को मेने
चाहत की उस इंतहां को जताऊं कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

एक वादा किया था खुद से पाना है तुम्हे
ख्वाबों से हकीकत में लाना है तुम्हे
तुम्ही बोलो वादे से मुकर जाऊं कैसे
अब मिला हूँ तुम से तो बिछड़ जाऊं कैसे

प्रणय

कानो कान किसी को खबर न होगी

जी भर के आज ऐश तो कर ले
दिल की मस्ती को cash तो कर ले
फिर बाद में इसकी उमर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

आज करना वही जो मूड में होगा
दिल तेरा नशे के घूट में होगा
फिर क्या जाने कब मिले ये मौका
न जाने कब तू ताबूत में होगा

आज कम ज्यादा की कदर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

अरे हाथ उठा कर कर ले दंगल
छोड़ society बना दे जंगल
weekdays तो तू बेच चूका है
weekend पे मंगल ही मंगल

अब control में तेरी नज़र न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

जेब है खाली फिकर नहीं रे
मस्ती पे इसका असर नहीं रे
सही गलत की छोड़ दे चिंता
जो दिल बोले है वही सही रे

आज पाप पुण्य की बकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

दुनिया में आये तो जीना होगा
जीवन है ज़हर पर पीना होगा
उस ज़हर में थोड़ी रम तो मिला ले
फिर DJ पर धुम-तक-धीना होगा

और गम की कोई फिकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

प्रणय

शायद गुम हो गयी ख्वाबों से !

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से
कोई ख्वाहिश थी एक छोटी सी
शायद गुम हो गयी ख्वाबों से

अक्सर कहलाती इश्क़ जो थी
बस प्यार की आखरी किश्त जो थी
वो धुंधली सी कुछ हो गयी है
उसका ज़िक्र खो गया बातों से

जब दूर हो गया उस से तो
जब ख़त्म हो गए किस्से तो
तब एक ज़माना बीत गया
जैसे नींद सी उड़ गयी रातों से

दिल की किताब में एक पन्ना था
जिसे कभी से अपना बनना था
वो मुड़ा हुआ पन्ना खो गया
जैसे रेत फिसल गयी हाथों से

मन जैसे कुछ बेचैन सा है
दीदार को प्यासे नैन सा है
पलकें जो बिछा दी राहों में
जैसे चमक सी खो गयी आँखों से

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से

प्रणय

इस भीड़ इस शहर से

तंग हुआ इस ज़िम्मेदारी से, इस बोझ से इस डर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

मैं चाहता था उड़ना पर पैरों मे थी जंजीरें
मुझ से नाराज़ थी हाथों की कुछ लकीरें
चल पड़ा आज़ादी ढूँढने अपने घर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

चीख पुकारों से जब मेरे कान गूँजते थे
दिल मे गुस्से के कुछ गुबार फूटते थे
कुछ सपने टूटते थे आँखों मे जर्जर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

जा रहा था पर कोई बात रह गयी थी
ज़िंदगी मुझ से कुछ राज़ कह गयी थी
कुछ तो था जिस को नज़र अंदाज़ कर रहा था
मैं था प्यासा पर दरिया मेरे पास बह रहा था

एक बच्चे की हंसी मे कुछ सुकून मिल गया था
जैसे प्यासे खेत को मानसून मिल गया था
एक बूढ़े को रास्ता बस पार ही कराया
सारे जहां की दौलत को जैसे मेने पाया
साथ बैठ के भूखे को रोटी जब खिलाई
उसके आंसुओं मे मेने सारी खुशी पाई
दिल को मिली एक उम्मीद इस नहर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

मेने रुक के दो पल सोचा मैं क्या खो रहा था
जो है उसे छोड़ कर जो न है पर रो रहा था
मुझे छोटा घर कभी अच्छा नहीं लगा था
मैं मिला उस से जिसे घर ही नहीं मिला था
बड़ी खुशी का इंतज़ार मैं करता ही आया
छोटी छोटी खुशियों को समेट नहीं पाया
फूल ज्यादा ही मिले थे इन काँटों भरी डगर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

मेने सोचा उड़ती पतंग को डोर रोकती है
काट के डोर को देखा पतंग कहा टिकती है
गम को भुला के जब सीखा जो मुस्कुराना
कुछ कोहरा हट गया था दिखने लगा ज़माना
हुई ज़िंदगी शुरू नए ही एक सफर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

प्रणय

तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है !

तेरे सिवा मेरी कोई रज़ा कहाँ है

तू मुझ मे ही कहीं बसी है मुझ से जुदा कहाँ है

 

तेरे सांस लेने से मेरा दिल धड़कता है

तू नहीं है तो मुझ मे मेरी जां कहाँ है

 

दिल का दरिया बहता है तेरी ही खातिर

तेरी नय्या है इसमें और कश्तीयां कहाँ है

 

तेरी मुस्कान से ही ज़िंदगी चल रही है मेरी

बिना तेरे इसमे मज़ा कहाँ है

 

मेरी ज़िद है तू, जज़्बा है, है मोहब्बत मेरी

दुनिया मे कोई इस कदर तुझ पे फिदा कहाँ है

 

तेरी राहों मे बनकर फूल मैं बिछता ही रहूँगा

तेरे कदमों के सिवा जहां मे फिज़ा कहाँ है

 

यूं ही आती रहना ख्वाबों मे मेरे

जब से सोया है तेरे ख़यालों मे दिल जागा कहाँ है

 

तेरी आंखे, तेरी बातें, तेरी ख़ुशबू, तेरी ज़ुल्फें

तेरे नख़रे सी दुनिया मे कोई अदा कहाँ है

 

रहे ऐसे ही तू इस दिल के जहां मे

इसके सिवा रब से कोई दुआ कहाँ है

 

तू यादों मे, बातों मे, निगाहों मे छुपी है

मत पूछ तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है

 

प्रणय