गलतफहमी ही सही पर बहलाने को अच्छी है !

ये गलतफहमी ही सही पर बहलाने को अच्छी है

कि मैं उसके ख्वाबों मे आता हूँ वो मुझ से प्यार करती है

ये बात ही दिल को मेरे सुकून देती है

कि मेरा ज़िक्र होने पर वो ठंडी आह भरती है

हकीकत जानने मे अब थोड़ा डर सा लगता है

कि क्या सामने आएगा और कैसे गुजरेगा

ये हकीकत है कोई सूरज नहीं यारों

कि जब रात को जाएगा तो कल पूरब ही से निकलेगा

चलो देखें आज़मा के किस्मत को भी अपनी

कि सूरज को कभी पश्चिम से उगते भी देखा है

कहीं ये हकीकत हो और हम गलत फहमी समझ बैठे

कि गलतफहमी और हकीकत मे यूं फर्क ही कितना है

प्रणय

मौत से मुलाक़ात

कल मौत से मुलाक़ात हुई

हाँ सही मे बहुत खूबसूरत थी वो

आँखों में तेज़ , होंठों पर मुस्कान

चेहरे पर शांति , आवाज़ में मिठास

बडी अदब थी उसकी खातिरदारी में

एक सुकून मिला उसके साथ बैठ कर

फिर मेने पूछ ही लिया , क्यों डरते हैं तुम से लोग

ज़िंदगी मे तुम जैसी कशिश तो नहीं

फिर तुम हर किसी की ख़्वाहिश क्यों नहीं

क्यों ये जतन सब का कि तुम्हारा सामना न हो

ऐसा क्यों कि हर मन मे तुम्हारी कामना न हो

एक अलग ही अंदाज़ लिए वो पलकें झुका कर मुसकुराई

कुछ ठहराव लिया उसने फिर धीरे से बात बताई

ज़िंदगी बेकरारी मैं क़रार हूँ

ज़िंदगी रास्ता मैं मंज़िल हूँ

ज़िंदगी तड़प मैं सुकून हूँ

ज़िंदगी कर्म मैं परिणाम हूँ

ज़िंदगी अनंत मैं अंत हूँ

ज़िंदगी सवाल मैं जवाब हूँ

ज़िंदगी मिथ्या मैं सत्य हूँ

ज़िंदगी कठिन मैं सरल हूँ

ज़िंदगी धोखा मैं विश्वास हूँ

ज़िंदगी अनिश्चित मैं निश्चित हूँ

पर बस यहीं आकर मैं ज़िंदगी से हार जाती हूँ

ज़िंदगी चलने का नाम है और मैं ठहर जाती हूँ

प्रणय

लड़का कवि है !

सुंदर सुशील बंदा नाम रवि है

बाकी सब कुछ ठीक है बस लड़का कवि है !

 

रिशतेदारों ने पूछा कि लड़का क्या है करता

आखिर अपना पेट कैसे है भरता

कहा घर वालों ने कि वो बनाता है ऊंची इमारतें ख्वाबों के रंगों से

पर architect नहीं है

ज़ख़्मों को कुरेद कर फिर मरहम भी लगाता है

पर doctor है ये भी fact नहीं है

वो चलाता है दुनिया को अपनी कल्पनाओं के पहियों पर

पर वो driver नहीं है

Virtual सपनों से cloud कि सैर कराता है

पर software engineer नहीं है

प्यार के सौदों मे महारत है हासिल

पर business man नहीं है

तारीफ़ों के पूल क्या खूब बनाता है

पर किसी का secretary या fan नहीं है

कभी जानता है सब कुछ तो कभी सब से अजनबी है

बाकी सब कुछ ठीक है बस लड़का कवि है !

 

लिखता रहता है अजीब सी बातें लय और छंद मे पिरोते हुये

बिताता है रातें जागते और दिन सोते हुये

अक्सर जवाब देता है अनसुने मुहावरों में

गिनती है उसको दुनिया लेखक, क़व्वाल, शायरों में

यूं तो सुधरा हुआ है पर बिगड़ी हुई छवि है

बाकी सब कुछ ठीक है बस लड़का कवि है !

 

कमाई के नाम पर कुछ आलोचक और कुछ प्रशंसक हैं

बचत के नाम पर दो कलम और कुछ पुराने कागज़ हैं

आँखों मे है खामोशी पर दिल मे आँधियाँ दबी हैं

बाकी सब कुछ ठीक है बस लड़का कवि है !

 

प्रणय

एक try तो बनता है !

वो स्वर्ग की अप्सरा मैं नर्क का चोकीदार

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

वो बेमिसाल शायरी किसी मशहूर शायर की

मैं अधूरी आशिकी किसी बदनाम शायर की

वो लहराती छलकाती कोई नदिया

मैं सूखा हुआ एक तालाब

वो फूलों का बाग जिसमे आई हो बहार

मैं पातझड़ का मौसम जैसे रेगिस्तान उजाड़

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

वो कमाल मैं बवाल

वो मस्त मैं बेहाल

वो सुंदर मैं बंदर

वो हीरा मैं पत्थर

वो आसमान मैं ज़मीन

वो तारीफ मैं तौहीन

वो नज़ाकत मैं शरारत

वो सुकून मैं कयामत

वो सुबह की मुस्कान मैं शाम का इंतज़ार

मैं सुबह का आलस वो शाम का सिंगार

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

प्रणय

जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

फिर क्या था मेरा दिल अपना किया उन्होने

 

कश्मीरी सेब से उनके लाल लाल गाल

पूनम के चाँद का रंग फीका किया उन्होने

 

राजस्थानी ठाठ सी उनकी चाल लाजवाब

इस चाल पर लाखों को कुर्बान किया उन्होने

 

दिल्ली की स्टाइल , मुंबई का उनमे ग्लैमर

एट्टीट्यूड पर कितनों को चलता किया उन्होने

 

मस्ती है उनमे जैसे भांगड़ा पंजाबी

धड़कने बढ़ गयी जब गिद्दा किया उन्होने

 

अदाएं है उनमे इतनी जितनी हैदराबाद मे बिरयानी

आ कर स्वाद--महफिल बढ़ा दिया उन्होने

 

झील सी उनकी आंखे जैसे केरल का ठहरा पानी

देखा जिस को प्यार से डूबा दिया उन्होने

 

MP के जंगलों सी ज़ुल्फें उनकी घनेरी

जो हो गया इसमे गुम, भटका दिया उन्होने

 

उनकी मीठी बातें जैसे बंगाल की मिठाई

इन बातों के आगे गुड़ को खट्टा किया उन्होने

 

और तारीफ क्या करूँ मैं, दुनिया बहुत है छोटी

नज़ारा--खूब दुनिया दिखा दिया उन्होने

 

प्रणय

क्या क्या चाहता हूँ

आज खोल दो ज़ुल्फें कि मैं बहकना चाहता हूँ

फैला दो आँचल हवाओं मे कि मैं महकना चाहता हूँ

जी भर के बिखेर दो मुस्कान हर तरफ

इनके मधुर संगीत पर मैं भी थिरकना चाहता हूँ

तुम्हारी आँखें देखी थी झील सी, तस्वीर मे एक दिन

दिल का शिकारा लेकर इसमे टहलना चाहता हूँ

कभी तो रूबरू हो लो कि खुश किस्मत ही समझेंगे

दीवाना हूँ मैं अपनी किस्मत बदलना चाहता हूँ

कल आई थी ख्वाबों मे और बातें बना कर चल दी

बैठो पास कि तुम्हारी बातों मे उलझना चाहता हूँ

तेरे इशारों पर चला जब से, लोग कहते हैं आवारा

दे दो ठिकाना दिल मे कि मैं सुधरना चाहता हूँ

चलो छोड़ो यही कह दो कि तुम्हारे बारे मे सोचूँगी

जो सोच लो इतना तो फिर क्या चाहता हूँ

न रोको मेरी चाहत को कि आज बरसात सी होगी

बस तुम पूछ लो मुझसे कि क्या क्या चाहता हूँ

प्रणय

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

करें बगावत अपनी ज़िद पर अड़ के देखें

आज चने के झाड पर चड़ के देखें

सुधर के भी देखा हमने ज़माने को

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

मिसाल तो फिर भी रहेगी बदनाम हुये तो क्या

वनवास तो जाना ही है फिर राम हुये तो क्या

तो कन्हैया से सीख रास लीला कर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

दुनिया क्या कहेगी किस को फिकर है

दुनिया की कहाँ कोई सुधरी नज़र है

चलो अब नरमी छोड़ें कुछ अकड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

कभी तो शर्म की सरहद बताई

तो कभी उम्र की भी दी दुहाई

अब उम्र कुछ हो हद से आगे बड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

अभी अभी तो निकले हैं पर ये मस्तियों के

अभी अभी तो हुये हैं जलवे अपनी हस्तियों के

चलो उड़ें आसमान मे हवा से लड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

फिर न कहना ज़िंदगी मे हाथ क्या आया

दोनों हाथ थे खाली तुमने तिनका उठाया

दोनों मुट्ठियों मे इस जहां को भर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

प्रणय