कानो कान किसी को खबर न होगी

जी भर के आज ऐश तो कर ले
दिल की मस्ती को cash तो कर ले
फिर बाद में इसकी उमर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

आज करना वही जो मूड में होगा
दिल तेरा नशे के घूट में होगा
फिर क्या जाने कब मिले ये मौका
न जाने कब तू ताबूत में होगा

आज कम ज्यादा की कदर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

अरे हाथ उठा कर कर ले दंगल
छोड़ society बना दे जंगल
weekdays तो तू बेच चूका है
weekend पे मंगल ही मंगल

अब control में तेरी नज़र न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

जेब है खाली फिकर नहीं रे
मस्ती पे इसका असर नहीं रे
सही गलत की छोड़ दे चिंता
जो दिल बोले है वही सही रे

आज पाप पुण्य की बकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

दुनिया में आये तो जीना होगा
जीवन है ज़हर पर पीना होगा
उस ज़हर में थोड़ी रम तो मिला ले
फिर DJ पर धुम-तक-धीना होगा

और गम की कोई फिकर न होगी
कानो कान किसी को खबर न होगी

प्रणय

शायद गुम हो गयी ख्वाबों से !

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से
कोई ख्वाहिश थी एक छोटी सी
शायद गुम हो गयी ख्वाबों से

अक्सर कहलाती इश्क़ जो थी
बस प्यार की आखरी किश्त जो थी
वो धुंधली सी कुछ हो गयी है
उसका ज़िक्र खो गया बातों से

जब दूर हो गया उस से तो
जब ख़त्म हो गए किस्से तो
तब एक ज़माना बीत गया
जैसे नींद सी उड़ गयी रातों से

दिल की किताब में एक पन्ना था
जिसे कभी से अपना बनना था
वो मुड़ा हुआ पन्ना खो गया
जैसे रेत फिसल गयी हाथों से

मन जैसे कुछ बेचैन सा है
दीदार को प्यासे नैन सा है
पलकें जो बिछा दी राहों में
जैसे चमक सी खो गयी आँखों से

कुछ छूट रहा है हाथों से
कुछ चूक गया है यादों से

प्रणय

इस भीड़ इस शहर से

तंग हुआ इस ज़िम्मेदारी से, इस बोझ से इस डर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

मैं चाहता था उड़ना पर पैरों मे थी जंजीरें
मुझ से नाराज़ थी हाथों की कुछ लकीरें
चल पड़ा आज़ादी ढूँढने अपने घर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

चीख पुकारों से जब मेरे कान गूँजते थे
दिल मे गुस्से के कुछ गुबार फूटते थे
कुछ सपने टूटते थे आँखों मे जर्जर से
इस आह इस कमजोरी इस भीड़ इस शहर से

जा रहा था पर कोई बात रह गयी थी
ज़िंदगी मुझ से कुछ राज़ कह गयी थी
कुछ तो था जिस को नज़र अंदाज़ कर रहा था
मैं था प्यासा पर दरिया मेरे पास बह रहा था

एक बच्चे की हंसी मे कुछ सुकून मिल गया था
जैसे प्यासे खेत को मानसून मिल गया था
एक बूढ़े को रास्ता बस पार ही कराया
सारे जहां की दौलत को जैसे मेने पाया
साथ बैठ के भूखे को रोटी जब खिलाई
उसके आंसुओं मे मेने सारी खुशी पाई
दिल को मिली एक उम्मीद इस नहर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

मेने रुक के दो पल सोचा मैं क्या खो रहा था
जो है उसे छोड़ कर जो न है पर रो रहा था
मुझे छोटा घर कभी अच्छा नहीं लगा था
मैं मिला उस से जिसे घर ही नहीं मिला था
बड़ी खुशी का इंतज़ार मैं करता ही आया
छोटी छोटी खुशियों को समेट नहीं पाया
फूल ज्यादा ही मिले थे इन काँटों भरी डगर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

मेने सोचा उड़ती पतंग को डोर रोकती है
काट के डोर को देखा पतंग कहा टिकती है
गम को भुला के जब सीखा जो मुस्कुराना
कुछ कोहरा हट गया था दिखने लगा ज़माना
हुई ज़िंदगी शुरू नए ही एक सफर से
इस राह इस भरोसे इसी भीड़ इस शहर से

प्रणय

तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है !

तेरे सिवा मेरी कोई रज़ा कहाँ है

तू मुझ मे ही कहीं बसी है मुझ से जुदा कहाँ है

 

तेरे सांस लेने से मेरा दिल धड़कता है

तू नहीं है तो मुझ मे मेरी जां कहाँ है

 

दिल का दरिया बहता है तेरी ही खातिर

तेरी नय्या है इसमें और कश्तीयां कहाँ है

 

तेरी मुस्कान से ही ज़िंदगी चल रही है मेरी

बिना तेरे इसमे मज़ा कहाँ है

 

मेरी ज़िद है तू, जज़्बा है, है मोहब्बत मेरी

दुनिया मे कोई इस कदर तुझ पे फिदा कहाँ है

 

तेरी राहों मे बनकर फूल मैं बिछता ही रहूँगा

तेरे कदमों के सिवा जहां मे फिज़ा कहाँ है

 

यूं ही आती रहना ख्वाबों मे मेरे

जब से सोया है तेरे ख़यालों मे दिल जागा कहाँ है

 

तेरी आंखे, तेरी बातें, तेरी ख़ुशबू, तेरी ज़ुल्फें

तेरे नख़रे सी दुनिया मे कोई अदा कहाँ है

 

रहे ऐसे ही तू इस दिल के जहां मे

इसके सिवा रब से कोई दुआ कहाँ है

 

तू यादों मे, बातों मे, निगाहों मे छुपी है

मत पूछ तू किस किस मे और कहाँ कहाँ है

 

प्रणय

था चेहरा जाना पहचाना

आज शाम देखा एक लड़की को

था चेहरा जाना पहचाना


अभी कुछ पल पहले की बात है जैसे

जब हाथों की उँगलियों के बराबर उम्र थी

बस दोस्ती के बारे मे ही सुना था हमने

प्यार की हमको नहीं खबर थी


 

पीछे बैठ कर बस करते थे इंतज़ार

कि वो मुड़ेगी और देखेगी मुस्कुरा कर

किताबों के पन्नों मे मन कहाँ था

सिर्फ देखते थे उसको ही आँखें चुरा कर


 

चंचल थे उसके बाल , मासूम सी आँखें

गुलाब से होंठ , ईत्र सी बातें

जब गलती से छू जाता था उसका हाथ मेरे हाथ से

फिर नींद का रिश्ता नहीं रहता था दिन से रात से


 

वो मिल गयी थी आज एक ज़माने बाद

वो मेरे ज़हन मे अब भी है पर उसको नहीं मैं याद

मेरी तरफ मुड़ी वो और मुस्कुराई

पर वो और उसकी नज़रें दोनों थी पराई


 

पूछा उसने कैसे हो, हम ने भी हाल बता दिया

लब्ज़ आज भी कह नहीं पाये, आँखों ने सब कुछ जता दिया

कहा याद मेरी आती है या भूल चुके हो अब सब कुछ

हम मुस्कुरा कर रह गए बस ज़ख्म उभर आए कुछ कुछ


 

कैसे बताएं तुम्हें कि बस तुम्हारा ही तो इंतज़ार था

पर दिल को अब समझा ही लिया कि तू किसी और का प्यार था

तू ख़ुश है इतना काफी है तेरे दिल को भी अब माफी है

तेरी यादों मे खुद को तड़पाना सरासर नाइंसाफी है


 

सब सपने पूरे होते नहीं सब लोग यही तो कहते है

कुछ लोग हमारी ज़िंदगी मे न होते हुये भी रहते है

तेरी यादों के गुच्छे मे से रोज़ एक धागा तोड़ लूँगा मैं

फिर सपने उन से बुन लूँगा बस इस तरहा जी लूँगा मैं


 

प्रणय

रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

कितने लड़कों का लूटा है तूने चैन रे छोरी

अरे pain killer को भी तू देदे pain रे छोरी

तू खड़ी जहां हो वहीं से लागे lane रे छोरी

 

तेरी चोटी जैसे पूंछ भैंस की हिलती जाए

तुझे देख देख छोरों की बांछें खिलती जाए

तू English बोले made in Britain रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

 

जो बातें कर दे दो चार बस प्यार की तू

ओए जान लेगी एक आध हज्जार की तू

पूरा शहर हो गया है बस तेरा fan रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

 

तेरी ज़ुल्फें बिखरी बिखरी तू हैरान सी लागे

भेजे से शैतान दिल से नादान सी लागे

जो भिड़ जाये तो लागे jacky chain रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

 

तेरे मुँह पर गाली हाथ पैर पर ना है काबू

कभी अदाओं से कभी घूंसों से तू दिखाती जादू

अरे government न तुझ पे लगा दे ban रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

 

तेरा लंबा कद और ऊपर से heels पाँच इंच की

तू आँख मारे, क्या खा रखी है गोली mint की

अरे धूप से बचना हो जाए ना tan रे छोरी

Ray ban का चश्मा पहन मिला ले नैन रे छोरी

 

प्रणय

मेरे दिल का शिकारा तेरी झील सी आँखों मे टहलता है !

मेरे दिल का शिकारा तेरी झील सी आँखों मे टहलता है

मन मेरा तेरी ज़ुल्फों की छांव मे बहलता है

मेरी बेताबियों का भँवरा मँडराता है तेरे गुलाब से होंठों के लिए

तेरी पलकों के तीखे तीर से तैयार है हम जान देने के लिए

तेरी वो मासूम सी बोली मिश्री घोल दे ज़हर मे भी

तेरी वो बेफिक्र अंगड़ाइयाँ सुकून दे तपती दोपहर मे भी

तेरी कमर की लचक जैसे नदिया की टेढ़ी राहें

तेरी हिरनी सी चाल जो देख के निकली आहें

तेरे होंठों के सुर्ख रंग को ही चुराया है शाम के सूरज ने

तेरे बदन की बनावट को ही उकेरा है अजंता की मूरत मे

तेरे हाथों की वो छुअन जैसे दस्तक हो बहार की

तेरे कदमो की धीमी आहट जैसे थपकी हो प्यार की

मन मेरा बस गुम रहता है तेरे दीदार के खयाल मे

फस गया हो जैसे परवाना शमा के खूबसूरत जाल मे

तेरा वो आँचल जैसे वादियों पर कोई बादल छाया

और तेरा वो मुस्कुराना जैसे मरते ने ज़िंदगी को पाया

प्रणय