एक try तो बनता है !

वो स्वर्ग की अप्सरा मैं नर्क का चोकीदार

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

वो बेमिसाल शायरी किसी मशहूर शायर की

मैं अधूरी आशिकी किसी बदनाम शायर की

वो लहराती छलकाती कोई नदिया

मैं सूखा हुआ एक तालाब

वो फूलों का बाग जिसमे आई हो बहार

मैं पातझड़ का मौसम जैसे रेगिस्तान उजाड़

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

वो कमाल मैं बवाल

वो मस्त मैं बेहाल

वो सुंदर मैं बंदर

वो हीरा मैं पत्थर

वो आसमान मैं ज़मीन

वो तारीफ मैं तौहीन

वो नज़ाकत मैं शरारत

वो सुकून मैं कयामत

वो सुबह की मुस्कान मैं शाम का इंतज़ार

मैं सुबह का आलस वो शाम का सिंगार

पर कुछ भी बोलो यारों ये प्यार है प्यार

इसलिए एक try तो बनता है !

प्रणय

जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

जो लखनवी अंदाज़ मे सजदा किया उन्होने

फिर क्या था मेरा दिल अपना किया उन्होने

 

कश्मीरी सेब से उनके लाल लाल गाल

पूनम के चाँद का रंग फीका किया उन्होने

 

राजस्थानी ठाठ सी उनकी चाल लाजवाब

इस चाल पर लाखों को कुर्बान किया उन्होने

 

दिल्ली की स्टाइल , मुंबई का उनमे ग्लैमर

एट्टीट्यूड पर कितनों को चलता किया उन्होने

 

मस्ती है उनमे जैसे भांगड़ा पंजाबी

धड़कने बढ़ गयी जब गिद्दा किया उन्होने

 

अदाएं है उनमे इतनी जितनी हैदराबाद मे बिरयानी

आ कर स्वाद--महफिल बढ़ा दिया उन्होने

 

झील सी उनकी आंखे जैसे केरल का ठहरा पानी

देखा जिस को प्यार से डूबा दिया उन्होने

 

MP के जंगलों सी ज़ुल्फें उनकी घनेरी

जो हो गया इसमे गुम, भटका दिया उन्होने

 

उनकी मीठी बातें जैसे बंगाल की मिठाई

इन बातों के आगे गुड़ को खट्टा किया उन्होने

 

और तारीफ क्या करूँ मैं, दुनिया बहुत है छोटी

नज़ारा--खूब दुनिया दिखा दिया उन्होने

 

प्रणय

क्या क्या चाहता हूँ

आज खोल दो ज़ुल्फें कि मैं बहकना चाहता हूँ

फैला दो आँचल हवाओं मे कि मैं महकना चाहता हूँ

जी भर के बिखेर दो मुस्कान हर तरफ

इनके मधुर संगीत पर मैं भी थिरकना चाहता हूँ

तुम्हारी आँखें देखी थी झील सी, तस्वीर मे एक दिन

दिल का शिकारा लेकर इसमे टहलना चाहता हूँ

कभी तो रूबरू हो लो कि खुश किस्मत ही समझेंगे

दीवाना हूँ मैं अपनी किस्मत बदलना चाहता हूँ

कल आई थी ख्वाबों मे और बातें बना कर चल दी

बैठो पास कि तुम्हारी बातों मे उलझना चाहता हूँ

तेरे इशारों पर चला जब से, लोग कहते हैं आवारा

दे दो ठिकाना दिल मे कि मैं सुधरना चाहता हूँ

चलो छोड़ो यही कह दो कि तुम्हारे बारे मे सोचूँगी

जो सोच लो इतना तो फिर क्या चाहता हूँ

न रोको मेरी चाहत को कि आज बरसात सी होगी

बस तुम पूछ लो मुझसे कि क्या क्या चाहता हूँ

प्रणय

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

करें बगावत अपनी ज़िद पर अड़ के देखें

आज चने के झाड पर चड़ के देखें

सुधर के भी देखा हमने ज़माने को

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

मिसाल तो फिर भी रहेगी बदनाम हुये तो क्या

वनवास तो जाना ही है फिर राम हुये तो क्या

तो कन्हैया से सीख रास लीला कर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

दुनिया क्या कहेगी किस को फिकर है

दुनिया की कहाँ कोई सुधरी नज़र है

चलो अब नरमी छोड़ें कुछ अकड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

कभी तो शर्म की सरहद बताई

तो कभी उम्र की भी दी दुहाई

अब उम्र कुछ हो हद से आगे बड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

अभी अभी तो निकले हैं पर ये मस्तियों के

अभी अभी तो हुये हैं जलवे अपनी हस्तियों के

चलो उड़ें आसमान मे हवा से लड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

फिर न कहना ज़िंदगी मे हाथ क्या आया

दोनों हाथ थे खाली तुमने तिनका उठाया

दोनों मुट्ठियों मे इस जहां को भर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

प्रणय 

बहलाने को दिल तेरा

चलो कुछ गुन गुनाता हूँ कोई नगमा सुनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

बस यूं ही रखना तू मुस्कान होठों पर

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

तेरी आँखों सी गहराई लिए कुछ खास लब्जों से

तेरे होंठों सी लाली लिए कुछ सुर्ख रंगों से

तेरी हिरनी जैसी चाल से, लहराते से रेशम बाल से

कहता हूँ कहानी कोई, तेरी झुकती पलकों से

अदाओं सी तेरी मैं कोई सरगम बनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

चाँद तारे तोड़ने का वादा नहीं करता

अपनी जान दे दूँ प्यार मे ये इरादा नहीं करता

ताज़ महल बनवाने की जरूरत नहीं मुझको

काम कोई मैं कभी आधा नहीं करता

बाहें फैला के हाल ए दिल तुझको बताता हूँ

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

प्रणय

तहज़ीब थी उनकी

वो हम से रूबरू तो हुए पर नज़रें न मिल पाईं

ये किस्मत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

सजदा किया हमने वो धीरे से मुसकाईं

ये जन्नत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

 

कभी वो पर्दों के किनारों से बस देख लेते थे

एक मुस्कान प्यारी सी दिल से फेंक लेते थे

इत्तेफाक से टकरा गए एक दिन राह मे

वो कहना चाहते थे कुछ पर जुबां न कह पाई

ये चाहत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

 

वो महफिल मे न कह सके, हालात की शिकवा

चाँदनी रात मे न कह सके, उस रात की शिकवा

दिलों ने सब कहा और सब सुना, किस बात की शिकवा

मंज़िल तो एक थी बस राहें न मिल पाई

ये फितरत थी हमारी या तहज़ीब थी उनकी

 

प्रणय

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

अगर उनके पास कोई प्यारा सा दिल होता

या उनका दिल नहीं पत्थर से बना होता

या फिर उस पत्थर पर कहीं प्यार लिखा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

 

चंद तारे तोड़ कर तो हर आशिक लाता है

कोई पत्थरों को जोड़ कर ताज महल बनाता है

कहीं परवाना शमा के आगोश मे जाता है

कोई होंश खो देता है, कोई होंश मे आता है

अगर इन सब का हासिल थोड़ी सी वफा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

उन्हे देख के दिल थामा फितरत है हमारी ये

दीदार-ए-हुस्न उनका शिद्दत है हमारी ये

चाहत है, ज़रूरत है, आदत है हमारी ये

तू और की हो जाए लानत है हमारी ये

बस तूने भी इसी तरहा ये हम से कहा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

प्रणय

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