चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

करें बगावत अपनी ज़िद पर अड़ के देखें

आज चने के झाड पर चड़ के देखें

सुधर के भी देखा हमने ज़माने को

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

मिसाल तो फिर भी रहेगी बदनाम हुये तो क्या

वनवास तो जाना ही है फिर राम हुये तो क्या

तो कन्हैया से सीख रास लीला कर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

दुनिया क्या कहेगी किस को फिकर है

दुनिया की कहाँ कोई सुधरी नज़र है

चलो अब नरमी छोड़ें कुछ अकड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

कभी तो शर्म की सरहद बताई

तो कभी उम्र की भी दी दुहाई

अब उम्र कुछ हो हद से आगे बड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

अभी अभी तो निकले हैं पर ये मस्तियों के

अभी अभी तो हुये हैं जलवे अपनी हस्तियों के

चलो उड़ें आसमान मे हवा से लड़ के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

फिर न कहना ज़िंदगी मे हाथ क्या आया

दोनों हाथ थे खाली तुमने तिनका उठाया

दोनों मुट्ठियों मे इस जहां को भर के देखें

चलो थोड़ा बिगड़ के देखें

 

प्रणय 

बहलाने को दिल तेरा

चलो कुछ गुन गुनाता हूँ कोई नगमा सुनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

बस यूं ही रखना तू मुस्कान होठों पर

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

तेरी आँखों सी गहराई लिए कुछ खास लब्जों से

तेरे होंठों सी लाली लिए कुछ सुर्ख रंगों से

तेरी हिरनी जैसी चाल से, लहराते से रेशम बाल से

कहता हूँ कहानी कोई, तेरी झुकती पलकों से

अदाओं सी तेरी मैं कोई सरगम बनाता हूँ

बहलाने को दिल तेरा मै कोई नज़्म गाता हूँ

चाँद तारे तोड़ने का वादा नहीं करता

अपनी जान दे दूँ प्यार मे ये इरादा नहीं करता

ताज़ महल बनवाने की जरूरत नहीं मुझको

काम कोई मैं कभी आधा नहीं करता

बाहें फैला के हाल ए दिल तुझको बताता हूँ

तेरे सजदे मे मैं अपनी पलकें बिछाता हूँ

प्रणय

तहज़ीब थी उनकी

वो हम से रूबरू तो हुए पर नज़रें न मिल पाईं

ये किस्मत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

सजदा किया हमने वो धीरे से मुसकाईं

ये जन्नत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

 

कभी वो पर्दों के किनारों से बस देख लेते थे

एक मुस्कान प्यारी सी दिल से फेंक लेते थे

इत्तेफाक से टकरा गए एक दिन राह मे

वो कहना चाहते थे कुछ पर जुबां न कह पाई

ये चाहत थी मेरी या तहज़ीब थी उनकी

 

वो महफिल मे न कह सके, हालात की शिकवा

चाँदनी रात मे न कह सके, उस रात की शिकवा

दिलों ने सब कहा और सब सुना, किस बात की शिकवा

मंज़िल तो एक थी बस राहें न मिल पाई

ये फितरत थी हमारी या तहज़ीब थी उनकी

 

प्रणय

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

अगर उनके पास कोई प्यारा सा दिल होता

या उनका दिल नहीं पत्थर से बना होता

या फिर उस पत्थर पर कहीं प्यार लिखा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

 

चंद तारे तोड़ कर तो हर आशिक लाता है

कोई पत्थरों को जोड़ कर ताज महल बनाता है

कहीं परवाना शमा के आगोश मे जाता है

कोई होंश खो देता है, कोई होंश मे आता है

अगर इन सब का हासिल थोड़ी सी वफा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

उन्हे देख के दिल थामा फितरत है हमारी ये

दीदार-ए-हुस्न उनका शिद्दत है हमारी ये

चाहत है, ज़रूरत है, आदत है हमारी ये

तू और की हो जाए लानत है हमारी ये

बस तूने भी इसी तरहा ये हम से कहा होता

तो फिर वही होता जो मंजूरे अदा होता

प्रणय

नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ !

अभी अभी किसी ने कहा कि रेखा पार न करो
अभी अभी किसी ने कहा कि यूँ सिंगार न करो
किया है किसी और ने और जुर्माना मैं भरूँ
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

रेखा पार मैं करूंगी तो तुम रावण बनोगे
चलो ना मांगती मैं सोने का हिरन
तुम राम बन सकोगे ?
दुनिया का डर तुमको और अग्नि में मैं जलूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

कभी डायन बुलाया मुझको मै सहती रही
दहेज़ की आग में जलाया मुझको मै सहती रही
इज्ज़त दे के दुनिया माँ मुझे कहती रही
फिर गाली बनाया मुझको मै सहती रही
बेटा चाहिए दुनिया मे, गर्भ मे मैं मरूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

चलो माना की हसरत है मेरी भी आसमानों की
कब तक जियूं मैं जिंदगी बस बेजुबानों की
कभी पतंग बनना चाहती थी उडती हुई
बस पिंजरे का पंछी बन कर मै रह गयी
ये दुनिया मेरी भी उतनी ही है, फिर क्यों मै डरूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

प्रणय

ये जाने क्या यार हुआ

प्यार हुआ इकरार हुआ फिर धीरे से इज़हार हुआ

उसने ना किया न हाँ , बस मुड के वो चली गयी

ये जाने क्या यार हुआ

बचपन में सुनी थी एक poem  Try  again Try  again

और दोस्तों की वो सीख, रोना छोड़ Be the man

आखिर प्यार हुआ था यारों कोई छोटी सी बात नही

जोश भर लिया फिर से मन में मानी हम ने हार नहीं

 

Try  किया हम ने फिर से, मांग कर खुदा से दुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

फिर किसी ने हमे बताया कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

हम तों boat में motar  लगा कर बैठे है हमारी कश्ती क्यों पार नहीं होती

चलो फिर से तूफ़ान में उतरेंगे कमर कस ली है अब ना डरेंगे

फिर से खेला हम ने जिंदगी का जुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

फिर एक कहावत सामने आई कि सब्र का मीठा होता है फल

कल से सीख आज को enjoy कर फिर देख सुधरेगा कल

फिर दिल में उम्मीद की किरण जगाई

खुदा को छोड़, प्यार की कसम खाई

अब एक तरफ खाई है एक तरफ है कुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

अब सच बात जब पता चली तब हम ने ये जाना है

 mobile ,music  और headphone का ये जमाना है

जब जब हम ने इज़हार किया वो music में मशगूल थी

हमने खुद ही कहा और खुद ही सुना बस यही हमारी भूल थी

 

कौन कहता है mobile से chitchat आसान हुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

प्रणय

यूँ बीच में अचानक ये प्यार कहाँ से आया

दोस्त ही तो थे इतने अरसे से हम तुम

रहते थे अपनी इस दुनिया में ही गुम

कभी नादान सी बातों में दिन थे गुज़रते

कभी छोटी सी बात पर में लड़ते झगड़ते

इन रिश्तों के मायने कभी सोचे नहीं थे

कुछ लब्ज़ अनसुने जो बोले नहीं थे

वो बातों की मस्ती कुछ महंगी कुछ सस्ती

वो बचकानी शरारत वो डरती हुई हिम्मत

जब आँखें थी मिलती वो बात कुछ अलग थी

जब पलकें थी झपकती वो शर्त की वजह थी

दिल से कहता था दोस्त है वो मेरी

उसने भी मुझे बस दोस्त ही कहा था

फिर दिल से ही पूछा क्या वाकई ये सच है

दिल भी क्या कहता, अब वो मेरा कहाँ था

ये रिश्ते जब बदले कुछ आहट तों हुई थी

उन सरसराहटो को कोई समझ ही न पाया

एक लड़का एक लड़की और दोस्ती ही थी फिर

यूँ बीच में अचानक ये प्यार कहाँ से आया

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