नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ !

अभी अभी किसी ने कहा कि रेखा पार न करो
अभी अभी किसी ने कहा कि यूँ सिंगार न करो
किया है किसी और ने और जुर्माना मैं भरूँ
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

रेखा पार मैं करूंगी तो तुम रावण बनोगे
चलो ना मांगती मैं सोने का हिरन
तुम राम बन सकोगे ?
दुनिया का डर तुमको और अग्नि में मैं जलूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

कभी डायन बुलाया मुझको मै सहती रही
दहेज़ की आग में जलाया मुझको मै सहती रही
इज्ज़त दे के दुनिया माँ मुझे कहती रही
फिर गाली बनाया मुझको मै सहती रही
बेटा चाहिए दुनिया मे, गर्भ मे मैं मरूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

चलो माना की हसरत है मेरी भी आसमानों की
कब तक जियूं मैं जिंदगी बस बेजुबानों की
कभी पतंग बनना चाहती थी उडती हुई
बस पिंजरे का पंछी बन कर मै रह गयी
ये दुनिया मेरी भी उतनी ही है, फिर क्यों मै डरूं
नज़रें तुम्हारी बुरी और पर्दा मैं करूँ

प्रणय

ये जाने क्या यार हुआ

प्यार हुआ इकरार हुआ फिर धीरे से इज़हार हुआ

उसने ना किया न हाँ , बस मुड के वो चली गयी

ये जाने क्या यार हुआ

बचपन में सुनी थी एक poem  Try  again Try  again

और दोस्तों की वो सीख, रोना छोड़ Be the man

आखिर प्यार हुआ था यारों कोई छोटी सी बात नही

जोश भर लिया फिर से मन में मानी हम ने हार नहीं

 

Try  किया हम ने फिर से, मांग कर खुदा से दुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

फिर किसी ने हमे बताया कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

हम तों boat में motar  लगा कर बैठे है हमारी कश्ती क्यों पार नहीं होती

चलो फिर से तूफ़ान में उतरेंगे कमर कस ली है अब ना डरेंगे

फिर से खेला हम ने जिंदगी का जुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

फिर एक कहावत सामने आई कि सब्र का मीठा होता है फल

कल से सीख आज को enjoy कर फिर देख सुधरेगा कल

फिर दिल में उम्मीद की किरण जगाई

खुदा को छोड़, प्यार की कसम खाई

अब एक तरफ खाई है एक तरफ है कुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

अब सच बात जब पता चली तब हम ने ये जाना है

 mobile ,music  और headphone का ये जमाना है

जब जब हम ने इज़हार किया वो music में मशगूल थी

हमने खुद ही कहा और खुद ही सुना बस यही हमारी भूल थी

 

कौन कहता है mobile से chitchat आसान हुआ

उसने ना किया न हाँ , ये जाने क्या यार हुआ

प्रणय

यूँ बीच में अचानक ये प्यार कहाँ से आया

दोस्त ही तो थे इतने अरसे से हम तुम

रहते थे अपनी इस दुनिया में ही गुम

कभी नादान सी बातों में दिन थे गुज़रते

कभी छोटी सी बात पर में लड़ते झगड़ते

इन रिश्तों के मायने कभी सोचे नहीं थे

कुछ लब्ज़ अनसुने जो बोले नहीं थे

वो बातों की मस्ती कुछ महंगी कुछ सस्ती

वो बचकानी शरारत वो डरती हुई हिम्मत

जब आँखें थी मिलती वो बात कुछ अलग थी

जब पलकें थी झपकती वो शर्त की वजह थी

दिल से कहता था दोस्त है वो मेरी

उसने भी मुझे बस दोस्त ही कहा था

फिर दिल से ही पूछा क्या वाकई ये सच है

दिल भी क्या कहता, अब वो मेरा कहाँ था

ये रिश्ते जब बदले कुछ आहट तों हुई थी

उन सरसराहटो को कोई समझ ही न पाया

एक लड़का एक लड़की और दोस्ती ही थी फिर

यूँ बीच में अचानक ये प्यार कहाँ से आया

हम भी मुकद्दमों के सब पैंतरे जानते हैं !

भले ही नामंज़ूर कर फ़रियाद को हमारी
हम भी मुकद्दमों के सब पैंतरे जानते हैं

तेरे अक्स ने तो आखिर सराहा है हमको
तेरे अक्स को ही तेरा तसव्वुर मानते हैं

आग का है दरिया ये इश्क यूँ सुना है
हम जैसे परवाने ही ये दरिया फांदते हैं

हम भी हैं जिद्दी मिजाज़ से यूँ तो
कर ही लेते हैं जो दिल से ठानते हैं

न हम कोई बादशाह न ही कोई मसीहा
पर कम से कम खुद को दीवाना मानते हैं

माना ये हुस्न तेरा इस जहाँ का तो नहीं है
हम आशिकों के लिए भी लोग गलियां छानते हैं

इम्तिहान दिए है आज तक हजारों
तेरी आजमाईशों को एहसान मानते हैं !

प्रणय

रोया, हंसा, खिल-खिलाया

रोया, हंसा, खिल-खिलाया

ऊँगली पकड़ के चला,
गिरा, उठा ,फिर चला
सुनना,बोलना,पढना सीखा
कही फेल हुआ कही पास

रिश्ते बनाये, दोस्त भी
कुछ निभाए कुछ भुलाये
किसी को याद किया
कभी पाया कभी खोया

कभी अपनों को दूर जाते देखा
किसी अजनबी को पास आते देखा
कभी उम्मीद से परे मिला तो
कभी तमन्नाओं को टूटते देखा

लिखे-उतारे दिल में
जिंदगी के कुछ अनकहे तथ्य
कुछ मीठे झूठ, कुछ कटु सत्य
कुछ सीखा दूसरों की गलतियों से
कुछ बड़ों की सीख से
कुछ खुद की ठोकर से

इतना कुछ तो किया ज़िन्दगी में
जब थक के बैठा तो चेहरे पर मुस्कान थी
पर जब मुट्ठी खोली तो हाथ खाली
तो कहाँ गयी वो सीख
वो अनुभव, एहसास, वो ख्वाबों की दौलत

ढूंढा यहीं कहीं आस-पास
अभी तो था सब कुछ, गया कहाँ

फिर मिली
एक छोटी सी चीज़
एक छोटी सी बात
एक छोटा सा सच
यही सब तो जिंदगी है कि “मैं रोया, हंसा, खिल-खिलाया”

प्रणय

ये Love Marriage है भाई !

जब हुआ पच्चीस का तो गया पापा के पास
और की वो बातें जो करनी थी हमको ख़ास
धीरे से हमने उनको दिल की बात बताई
जेब से निकाल कर लड़की की फोटो दिखाई
करता हूँ मैं प्यार इस से, करवा दो मेरी शादी
खाना भी वो बना लेती है लड़की सीधी-सादी
मान गए है उसके मामा, बुआ और चाचा-चाची
मियां-बीवी भी राज़ी हैं फिर आप क्यों बनते काजी
और इसके आगे तुमको हम क्या बताएं
बस तुम्हारे दिमाग से एक संदेह हटायें
मांगी तो थी हमने उनसे एक प्यारी सी लुगाई
पर कुछ दिन में ही समझ आ गया ये love marriage  है भाई

सुबह उठते ही चाय बनाओ और बिस्तर पर उसे पिलाओ
9 बजे नाश्ता बनाओ भागे दौड़े ऑफिस जाओ
रोज़ शाम को घर पर आकर करो कपड़ों की धुलाई

बच्चों की है चड्डी बदलना उसके बाद तेल है मलना
अब थोड़ी सी आगे चलना किचन में है पुरियां तलना
बर्तन मांजे, सब्जी काटी देता रो-रो दुहाई

शौपिंग काम्प्लेक्स , ब्यूटी पार्लर रोज़ है उसको जाना
अपने घर में गढ़ा है जैसे कोई कुबेर का खजाना
अपनी तो है भाई एक मजदूर जैसी कमाई

आज़ादी सब छीन जाती है हर पल वो दिमाग खाती है
प्यार से कहती है सुनते हो जी बस फिर पीछे पड़ जाती है
झाड़ू और बेलन से अब तो डर लगता है भाई

पहले महीने तो लगती थी वो सोने की गुडिया
बस दुसरे ही महीने से हो गयी आफत की पुड़िया
जिसको समझा प्यार वो निकला हरजाई
कुछ दिन में ही समझ आ गया ये Love Marriage  है भाई

प्रणय

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कुछ लहरें कुछ पल

बैठा था नम रेत पर समंदर के किनारे
देख रहा था आती हुई लहरों को
हर लहर नयी थी पर
पुरानी लहर से मिलती जुलती
क्या अलग था ये मैं पहचान नहीं पाया

कभी देखा होगा तुमने भी
अपलक आँखों से
कुछ आते हुए पलों को
कुछ आती हुई लहरों को
फिर जब दोनों चले जाते हैं
कहाँ पता चलता है

जब जाती है लहर
ले जाती है कुछ ज़मीन पैरों के नीचे से
और दे जाती है कुछ तोहफे
कुछ काम के कुछ ख़ास कुछ यूँ ही
कुछ ऐसा ही वो पल भी तो करते हैं
जो दे जाते हैं
कुछ यादें कुछ बातें कुछ यूँ ही

मैं तो बस ढूंढ़ रहा था कोई अंतर
लहरों और पलों में
पर यूँ ही वक़्त बीत गया
कुछ ख़ास हाथ न लगा
सिवाय कुछ रेत के जो हाथों में रह गयी थी
और कुछ बात के जो यादों में रह गयी थी

प्रणय

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